रायपुर, 10 अप्रैल 2026।
अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले संभावित बाल विवाहों को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
आयोग कार्यालय रायपुर में 10 अप्रैल को दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यभर के अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी और आयोग के अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान जिलावार बाल विवाह रोकथाम की तैयारियों की जानकारी ली गई और आवश्यक निर्देश दिए गए।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे पर्वों पर बाल विवाह की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है, इसलिए ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में मुनादी, जागरूकता अभियान, टीम गठन और निगरानी व्यवस्था को सक्रिय किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संभावित बाल विवाह की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए।
बैठक में विभिन्न जिलों के नवाचारों पर भी चर्चा हुई। कांकेर जिले में चलाए जा रहे ‘मेरी आवाज सुनो’ अभियान के तहत 17-18 वर्ष की बालिकाओं को अपनी बात रखने का मंच दिया जा रहा है, जिससे उनमें जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़े। वहीं बीजापुर जिले में ‘बीजा दूतिन’ पहल के माध्यम से किशोर-किशोरियां स्वयंसेवक बनकर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैला रहे हैं।
सुकमा जिले में स्थानीय गोंडी भाषा और जशपुर जिले में सादरी व कुरुख भाषा में प्रचार-प्रसार की पहल को भी आयोग ने सराहा। सूरजपुर जिले में पिछले वर्षों की तुलना में बाल विवाह के मामलों में कमी आने की जानकारी दी गई, जबकि गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही में बैगा समुदाय की एक बालिका द्वारा खुद अपने बाल विवाह की सूचना देकर उसे रुकवाने का उदाहरण सामने आया।
बैठक में निर्देश दिए गए कि 14 अप्रैल को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह रोकथाम को अनिवार्य एजेंडा बनाया जाए। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, स्वयंसेवी युवाओं को अभियान से जोड़ने और स्थानीय भाषाओं में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
आयोग ने अधिकारियों से कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत अधिकारियों की जिम्मेदारियों को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि समाज में इस कुरीति के खिलाफ संवेदनशीलता बढ़ सके।
