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गढ़चिरौली में माओवाद पर बड़ा प्रहार,जंगल में चल रही हथियार फैक्ट्री तबाह, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री नष्ट


सरेंडर नक्सलियों के खुलासे के बाद चला ऑपरेशन, सुरक्षा बलों ने जंगल में दबा रखा माओवादी नेटवर्क किया ध्वस्त


राजनांदगांव/गढ़चिरौली।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की सीमा से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। जंगलों में छिपाकर रखी गई माओवादियों की हथियार बनाने की फैक्ट्री और भारी मात्रा में तकनीकी सामान को पुलिस ने खोज निकालकर मौके पर ही नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई को माओवादियों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है।


गढ़चिरौली पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन फाइनल स्ट्राइक” के तहत यह कार्रवाई उस समय संभव हुई, जब पुलिस के सामने सरेंडर कर चुके माओवादियों ने पूछताछ में कई अहम और गोपनीय जानकारियां दीं। खुलासा हुआ कि पोमकेन-बिनगुंडा इलाके के घने जंगलों में माओवादियों ने हथियार निर्माण और विस्फोटक तैयार करने के लिए गुप्त ठिकाना बना रखा था, जहां बड़ी मात्रा में सामान दबाकर रखा गया था।


सूचना मिलते ही गढ़चिरौली स्पेशल ऑपरेशन टीम, प्राणहिता यूनिट की संयुक्त 6 टीमें और BDDS की 2 विशेष टीमें जंगल क्षेत्र में रवाना की गईं। 22 मई को पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने इलाके की घेराबंदी कर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों की तलाशी के बाद जंगल के भीतर छिपाई गई माओवादी सामग्री बरामद कर ली गई।


बरामद सामान में हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाली खराद मशीन, बीजीएल पाइप, 12 बोर पाइप, इन्वर्टर, जनरेटर, बैटरी, ग्राइंडिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन, जिगसॉ मशीन, प्रेशर पंप, सोलर पैनल और 20 फीट लंबी पाइप सहित कई तकनीकी उपकरण शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे सामान को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।


पुलिस अधिकारियों के मुताबिक माओवादी इन हथियारों और विस्फोटकों का इस्तेमाल नक्सली सप्ताह, चुनावी गतिविधियों और सुरक्षा बलों पर हमले के दौरान करने की तैयारी में थे। लंबे समय से जंगलों में छिपाकर रखे गए इन संसाधनों के जरिए माओवादी संगठन अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहे थे।


गढ़चिरौली पुलिस का दावा है कि लगातार चल रहे अभियानों और सरेंडर नीति के कारण जिले में माओवाद अब कमजोर पड़ चुका है। हाल के महीनों में कई माओवादी या तो गिरफ्तार हुए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब जंगलों में छिपे हर नेटवर्क और हथियार भंडार को खत्म करने के मिशन में जुटी हुई हैं।

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