रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा, लेकिन उससे पहले गठित समिति समाज के सभी वर्गों के बीच जाकर सुझाव और राय लेगी। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पहल का कड़ा विरोध करते हुए इसे भाजपा का राजनीतिक एजेंडा और सत्ता बचाने का प्रपंच बताया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है। यह समिति प्रदेश के विभिन्न वर्गों, समुदायों और हितधारकों से संवाद कर उनकी राय और सुझाव एकत्र करेगी। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और उसके आधार पर राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि यूसीसी देश के लिए अत्यंत पेचीदा और संवेदनशील विषय है। भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों, परंपराओं और रीति-रिवाजों वाला देश है, इसलिए सभी पर एक समान कानून लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए यूसीसी का मुद्दा उठा रही है।
अमरजीत भगत ने कहा कि प्रदेश के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले अनेक आदिवासी समुदायों को अभी तक यूसीसी की पूरी जानकारी भी नहीं है। ऐसे में बिना व्यापक जागरूकता और संवाद के इसे लागू करने का प्रयास उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि यूसीसी का आम जनता पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और सरकार को पहले लोगों की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
प्रदेश सरकार की ओर से यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने और कांग्रेस के विरोध के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में समिति की बैठकों, जनसंवाद और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच इस विषय पर प्रदेश की राजनीति और तेज होने की संभावना है।
