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राम मंदिर चंदा विवाद पर विधानसभा में सियासी घमासान, स्थगन प्रस्ताव खारिज; सत्ता-विपक्ष में तीखी नोकझोंक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर सदन में जमकर राजनीतिक घमासान हुआ।

शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव लाकर इस मामले पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने इसे करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के लोगों ने श्रद्धा के साथ चंदा दिया था, ऐसे में चंदे से जुड़े कथित मामले पर सदन में चर्चा होना आवश्यक है। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय मानते हुए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।


नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यदि चंदे के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उस पर जवाबदेही तय होना जरूरी है और सदन में इस विषय पर चर्चा कराई जानी चाहिए।


इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं 12 फरवरी 2021 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1 लाख 21 हजार रुपये का चंदा दिया था। उन्होंने कहा कि उनके जैसे छत्तीसगढ़ के लाखों श्रद्धालुओं ने भी अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर निर्माण में सहयोग दिया है। इसलिए यह कहना कि यह छत्तीसगढ़ का विषय नहीं है, उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब जनता का पैसा और आस्था दोनों जुड़े हों तो सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है।


सत्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस की मांग का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष किसी भी विषय पर चर्चा से नहीं भाग रहा है, लेकिन विधानसभा की कार्यवाही नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप ही संचालित होगी। जिस विषय पर राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र नहीं है, उस पर स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा नहीं कराई जा सकती।


सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी स्पष्ट किया कि यह मामला उत्तर प्रदेश से संबंधित है और इसकी जांच एसआईटी कर रही है। उन्होंने कहा कि चूंकि मामला दूसरे राज्य का है और जांच प्रक्रिया जारी है, इसलिए विधानसभा के नियमों के अनुसार इस विषय पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में चर्चा नहीं हो सकती।


वहीं, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में छत्तीसगढ़ अपराध और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया था तथा प्रदेश को दोनों हाथों से लूटने का काम किया गया। अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन स्थापित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में किसी भी आपराधिक घटना पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में है। कांग्रेस के पास जनहित के मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह ऐसे विषयों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है।


विपक्ष ने अध्यक्ष के निर्णय पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष विपक्ष द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है। कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग पर अड़े रहे। हंगामे के कारण सदन का माहौल काफी देर तक गर्म रहा।


आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित नहीं है, इसलिए नियमों के तहत स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद कार्यवाही आगे बढ़ाई गई, लेकिन राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी तल्खी पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही।

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