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CAG की रिपोर्ट से सरकार घिरी: जल जीवन मिशन फेल, मनरेगा में नियम ताक पर, वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल


रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट ने सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की सुस्त रफ्तार, मनरेगा में व्यापक अनियमितताओं और बजट प्रबंधन की खामियों का खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट सामने आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज कर दी। सबसे बड़ा खुलासा जल जीवन मिशन को लेकर हुआ है। CAG के अनुसार प्रदेश के किसी भी जिले या ब्लॉक में योजना का 100 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हुआ। ग्राम, जिला और राज्य स्तर पर ठोस कार्ययोजना के अभाव तथा धीमे क्रियान्वयन के कारण केंद्र से मिलने वाले 6,480 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य को नहीं मिल सका। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 तक प्रदेश के केवल 3.64 प्रतिशत घरों में ही नियमित नल से जल आपूर्ति हो रही थी। वहीं 13.31 लाख घरों में नल तो लगा दिए गए, लेकिन उनमें पानी नहीं पहुंचा। कई स्थानों पर जल स्रोत, ओवरहेड टैंक और बिजली कनेक्शन की व्यवस्था किए बिना ही नल लगाने पर CAG ने कड़ी आपत्ति जताई है।


मनरेगा की समीक्षा में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 86 प्रतिशत मनरेगा कार्य ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना ही मंजूर किए गए। नियमों के विपरीत कार्य योजनाएं तैयार की गईं और स्थानीय जरूरतों के बजाय मनमाने तरीके से कार्यों का चयन हुआ। सामाजिक अंकेक्षण और निगरानी व्यवस्था को भी कमजोर बताते हुए CAG ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।


राज्य की वित्तीय स्थिति पर पेश रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था (GSDP) 5.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची, लेकिन इसके साथ कर्ज का बोझ भी बढ़ा। सरकार ने 33,463 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया, जिसमें लगभग आधी राशि पुराने कर्ज के भुगतान में खर्च हो गई। हालांकि राजकोषीय घाटा घटकर 4.48 प्रतिशत रहा, लेकिन 25 नई योजनाओं के लिए रखे गए 261 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए। वहीं 6 विभागों ने 1,538 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय किया। मार्च 2025 तक राज्य पर 1.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां दर्ज की गईं।


CAG ने अपनी रिपोर्ट में बजट प्रबंधन, सरकारी लेखांकन और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार की जरूरत बताई है। विधानसभा में रिपोर्ट पेश होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल बताते हुए पूरे मामले की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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