रायपुर/धर्म डेस्क। भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण (सावन) मास का पहला सोमवार व्रत इस वर्ष 3 अगस्त को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में सावन के सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। सावन मास भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है और इस पूरे माह शिवालयों में भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक किया जाता है। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प, चंदन और फल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप तथा शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सावन सोमवार का व्रत अविवाहित युवतियां मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए तथा विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से रखती हैं। वहीं पुरुष भी परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कार्यों में सफलता के लिए यह व्रत करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किए गए व्रत और पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की सभी बाधाओं को दूर करते हैं।
इस वर्ष उत्तर भारत की पूर्णिमांत परंपरा के अनुसार सावन मास 30 जुलाई से प्रारंभ हुआ है और पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा।
प्रमुख पूजा सामग्री
गंगाजल या स्वच्छ जल
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत)
बेलपत्र
धतूरा और भांग
सफेद पुष्प
चंदन
फल और प्रसाद
दीप, धूप और अक्षत
महत्व
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
मनोकामनाओं की पूर्ति और बाधाओं का निवारण होता है।
परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
