किरण सिंह देव पद पर कायम, फिर भी नई कुर्सी की तलाश; दिल्ली बुलावे और मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
रायपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव सड़क हादसे में घायल क्या हुए, प्रदेश संगठन में एक और कुर्सी की जरूरत महसूस होने लगी। अध्यक्ष बदले नहीं हैं, कुर्सी खाली भी नहीं हुई है, लेकिन अब कार्यकारी अध्यक्ष की तलाश जरूर शुरू हो गई है। इस संभावित नई जिम्मेदारी के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, पार्टी संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने पर विचार कर रही है। यानी अध्यक्ष वही रहेंगे, लेकिन कामकाज संभालने के लिए एक और अध्यक्षनुमा व्यवस्था तैयार होगी। फिलहाल पार्टी की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दिल्ली बुलावा और मुलाकात ने बढ़ाया सस्पेंस
तोखन साहू को मंगलवार को दिल्ली बुलाए जाने की चर्चा और वहां किरण सिंह देव से उनकी मुलाकात ने इस सियासी चर्चा को और हवा दे दी है। अब सवाल यही है कि यह मुलाकात महज संगठनात्मक औपचारिकता थी या फिर ‘नई जिम्मेदारी’ की पटकथा लिखी जा रही है?
भाजपा के भीतर कई नामों पर मंथन की चर्चा है, लेकिन तोखन साहू का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। अगर फैसला उनके पक्ष में जाता है तो एक ही प्रदेश में अध्यक्ष भी रहेंगे और कार्यकारी अध्यक्ष भी—यानी संगठन के पास नेतृत्व की कमी नहीं, बस एक अतिरिक्त कुर्सी की दरकार है।
बीमारी नहीं, व्यवस्था का इलाज!
पार्टी की ओर से साफ किया गया है कि किरण सिंह देव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की कोई बात नहीं है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे तो कार्यकारी अध्यक्ष की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब पार्टी नेतृत्व के पास है, लेकिन सियासी चर्चा में इसे संगठन की ‘एहतियाती व्यवस्था’ बताया जा रहा है।
फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। तब तक भाजपा के भीतर एक ही सवाल घूम रहा है—कार्यकारी अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन बैठेगा और क्या यह कुर्सी सिर्फ हादसे की वजह से निकली है या संगठन की कोई बड़ी सियासी जरूरत भी इसके पीछे है?
