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कामधेनु विश्वविद्यालय की भर्ती पर राजभवन का बड़ा एक्शन, नियुक्ति और इंटरव्यू पर तत्काल रोक

रोस्टर, आरक्षण और बैकलॉग में गड़बड़ी की शिकायतों पर सख्ती; 52 लाख के काम के बदले 90 लाख भुगतान का मामला भी जांच के दायरे में

दुर्ग। कामधेनु विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर भर्ती को लेकर उठे विवाद ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजभवन ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों की भर्ती, नियुक्ति और इंटरव्यू की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक तत्काल रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय में भर्ती के दौरान रोस्टर निर्धारण, आरक्षण के प्रावधानों, बैकलॉग पदों और स्वीकृत पदों की संख्या को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। आरोप लगाए गए थे कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। इन शिकायतों के अलावा विश्वविद्यालय के भवन निर्माण और रखरखाव के कार्यों में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है। इसी सिलसिले में 52 लाख रुपये के कार्य के लिए करीब 90 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस मामले ने वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

गौरतलब है कि आदिम जाति विकास एवं कृषि से जुड़े मंत्री रामविचार नेताम पहले ही विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दे चुके हैं। वहीं, दुर्ग ग्रामीण विधायक ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की थी।

अब राजभवन के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है। अगले आदेश तक न नियुक्तियां होंगी और न ही इंटरव्यू की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। फिलहाल सभी की नजर जांच के निष्कर्षों पर है। बड़ा सवाल यह है कि शिकायतों में कितनी सच्चाई सामने आती है और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

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