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छग में 38.2 % लोग पीते हैं शराब – ड़ां. रामचंद्र सिंह देव, कई राज्यों से छग में आते हैं अवैध शराब

कोरिया / छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जब से शराब बेचने की बात सामने आई है उसके बाद से लगातार इस मामले का विरोध होने लगा है।

आबकारी नियमों में बदलाव और ठेका प्रथा बंद कर शराब बेचने का निर्णय लिया जा रहा है तब से कांग्रेस के द्वारा प्रदेशभर में पूर्ण शराब बंदी की मांग को लेकर विरोध किया जा रहा है, इसके बाद भी प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी हो पाने के आसार कहीं से नजर नहीं आ रहा है इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रथम आबकारी मिनिस्टर ड़ां. रामचंद्र सिंह देव से चर्चा कर विस्तार पूर्वक बात किया गया तब श्री सिंह देव ने कहा कि एक रूपया का शराब पीने से 10 रूपए का उस व्यक्ति को नुकसान होता है साथ ही झगड़ा, बिमारियां, कोर्ट कचहरी और काम पर नहीं जाना जैसे दुष्परिणाम सामने आते हैं। इसलिए प्रदेश व प्रदेशवासियों के हित को ध्यान में रखकर छग में शराब बंदी किया जाना जरुरी हो गया है। छग की जनता को शराब के चलते बहुत नुकसान होता है। हिन्दुस्तान में औसत है कि 24.4 प्रतिषत लोग शराब का सेवन करते हैं वहीं छग में 38.2 प्रतिषत लोग सेवन करते हैं इस हिसाब से 13200 करोड़ रूपए की शराब बिकती है। इसके अलावा महारास्ट्र, उत्तर प्रदेश, मप्र, झारखंण्ड, आन्ध्र प्रदेश, उड़ीसा आदि प्रदेशो से अवैध रूप से शराब आसानी से यहाँ आती है जो छग में बिकती है। इसके अलावा प्रदेश में महुआ व कोसना शराब भी अवैध रूप से बनकर बिकती है, इस तरह से शराब छग में सेवन होता है। कितने का होता है अनुमान लगाना मुस्किल है।
प्रदेश को शराब से सबसे अच्छी आय- ड़ां. रामचंद्र सिंह देव ने यह भी कहा कि शराब दुकानों की पहले निलामी होती थी वो प्रथा बंद कर दी गई फिर लाटरी में एक दुकान अच्छी, एक मध्यम एक खराब दुकान ठेके पर देने की व्यवस्था मेरे द्वारा शुरू किया गया बाद में ऐसी व्यवस्था पुरे देश – भर में लागू हुआ। सरकार को शराब से मिलने वाले आय के बारे में बताते हुए कहा कि वर्ष 2000 में जब छत्तीसगढ़ बना तब प्रदेश को शराब से आमदनी 250 करोड़ रूपए होता था। वर्ष  2003-2004 में बढ़कर 500 करोड़ रूपए हो गया और अब वर्ष 2016-2017 में शराब से 3300 करोड़ रूपए सरकार को आमदनी हो रही है।
पूर्ण शराब बंदी से होने वाले घाटा को सामान्य रूप से वहन किया जा सकता है-  प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी करने से सरकार को शराब से मिलने वाले 3300 करोड़ रूपए का घाटा कुछ नहीं है, इसको सरकार सामान्य रूप से वहन कर सकती है। सरकार द्वारा फिजूल खर्ची व फिजूल खरिदी रोकी जाए तो 7 से 8 करोड़ रूपए की बचत हो सकती है। एनजीओ को जो पैसा दिया जाता है उसका भी कोई लाभ नहीं होता सही रूप से पालन हो तो 70-80 प्रतिषत बच सकता है। इसी प्रकार खनिज की रायल्टी से टैक्स व वैट अगर पूरा वसूली हो तो 7 से 9 करोड़ आमदनी बढ़ सकती है।
सरकार को सलाह-  प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी की जाए चुनाव में नाजायज तौर से शराब बांटा जाता है उसका भी कड़ाई से रोक होनी चाहिए। पूरे प्रदेश में मांग हो रही है नशा बंदी की कड़ाई से नशा बंदी रोकी जाए लेकिन आदिवासियों को शराब बनाने की जो मामूली छूट है रहनी चाहिए।

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