दलदल शिवनी से टेकारी मार्ग पर प्रशासन की अनदेखी उजागर
रायपुर। दलदल शिवनी से टेकारी की ओर बढ़ते ही हकीकत खुद बयां हो जाती है। प्रतिबंध के बावजूद अवैध लाल ईंट भट्टे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। बहते नालों और जल स्रोतों के किनारे अस्थायी भट्टे बनाकर लाखों की संख्या में लाल ईंटें तैयार की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन भट्टों के लिए आसपास की उपजाऊ मिट्टी बड़े पैमाने पर खोदी जा रही है, जिससे जमीन बंजर होती जा रही है। वहीं जल स्रोतों के किनारे मिट्टी खनन और धुएं के कारण पर्यावरण व जल संरक्षण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। बरसात के दिनों में यही मिट्टी नालों में बहकर जल प्रवाह को भी प्रभावित करती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की आंखों के सामने यह पूरा खेल कैसे चल रहा है? जब अवैध ईंट भट्टों पर स्पष्ट प्रतिबंध है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में पर्यावरणीय क्षति और गंभीर रूप ले सकती है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और अवैध भट्टों पर कब तक प्रभावी कार्रवाई करता है।
