केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने रायपुर में की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक, NIFT के सहयोग से डिजाइन प्रशिक्षण और निर्यात एजेंसियों से जुड़ाव पर जोर
रायपुर। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को रायपुर में रेशम, खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र के विकास को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय बुनकरों, शिल्पियों एवं कारीगरों की आय बढ़ाने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से ग्रामीण एवं कुटीर उद्योग से जुड़े प्रत्येक उद्यमी की वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनकरों और शिल्पियों को बाजार की मांग के अनुरूप नियमित डिजाइन विकास प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सके।
बैठक में स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि उद्यमियों को प्रमुख निर्यात एजेंसियों से जोड़ा जाए, जिससे छत्तीसगढ़ के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
रेशम उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए रेशम केंद्रों में फ्लोरीकल्चर और सब्जी उत्पादन जैसी मिश्रित खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई। साथ ही, सिल्क और कॉटन के साथ अन्य प्राकृतिक रेशों के मिश्रण से नए उत्पाद विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
पर्यावरण अनुकूल वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कपड़ों की रंगाई में हल्दी, कत्था, मेहंदी और विभिन्न फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों के अधिक उपयोग पर बल दिया गया। आधुनिक डिजाइन और उत्पाद विकास के लिए राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) के विशेषज्ञों का तकनीकी सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
