Advertisement Carousel

राष्ट्रगान के साथ शुरू होती है श्यामनगर की हर सुबह, 26 जनवरी 2018 से कायम है देशभक्ति की अनूठी परंपरा

गरियाबंद श्यामनगर। देशभक्ति केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं, बल्कि इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा भी बनाया जा सकता है। श्यामनगर ग्राम पंचायत के लोग पिछले आठ वर्षों से अपनी अनूठी परंपरा के जरिए इसका संदेश दे रहे हैं। यहां 26 जनवरी 2018 से हर दिन सुबह ठीक 9 बजे राष्ट्रगान की परंपरा शुरू की गई, जो आज भी पूरी निष्ठा के साथ जारी है।

सुबह जैसे ही घड़ी की सुई 9 बजाती है, श्यामनगर में राष्ट्रगान की धुन गूंज उठती है। खास बात यह है कि राष्ट्रगान के दौरान गांव में जो व्यक्ति जहां होता है, वहीं रुककर सावधान की मुद्रा में राष्ट्रगान का सम्मान करता है। दुकान पर मौजूद दुकानदार हों, रास्ते में चल रहे राहगीर, खेत में काम कर रहे किसान या अपने काम में व्यस्त ग्रामीण—राष्ट्रगान की धुन सुनते ही सभी कुछ क्षणों के लिए अपना काम रोक देते हैं।

2018 में शुरू हुई थी पहल

गांव के लोगों के अनुसार, इस राष्ट्रगान कार्यक्रम की शुरुआत 26 जनवरी 2018 को की गई थी। इसके पीछे उद्देश्य गांव में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करना था। शुरुआत में यह एक छोटी पहल थी, लेकिन धीरे-धीरे पूरा गांव इससे जुड़ता चला गया। आज यह कार्यक्रम श्यामनगर की पहचान बन चुका है।

ग्राम पंचायत श्यामनगर में करीब 1,529 मतदाता हैं और गांव की आबादी लगभग 6,000 बताई जाती है। इतनी बड़ी आबादी वाले गांव में रोजाना एक निश्चित समय पर राष्ट्रगान होना और लोगों का अपने स्थान पर रुककर उसका सम्मान करना सामूहिक अनुशासन और राष्ट्रीय भावना की मिसाल पेश करता है।

बच्चों से बुजुर्गों तक सभी होते हैं शामिल

इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी एक वर्ग की भागीदारी नहीं है। बच्चे, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग, व्यापारी, किसान और मजदूर—सभी अपनी-अपनी जगह से राष्ट्रगान का सम्मान करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसका सबसे सकारात्मक असर बच्चों पर पड़ रहा है। वे बचपन से ही राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की भावना सीख रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया अनुभव

उप सरपंच वामन निर्मलकर के अनुसार, रोज सुबह राष्ट्रगान की यह परंपरा गांव में अनुशासन और एकजुटता की भावना पैदा करती है। उनका कहना है कि यह केवल राष्ट्रगान बजाने की पहल नहीं, बल्कि ग्रामीणों को राष्ट्र और देश के प्रति अपने कर्तव्य का एहसास कराने का माध्यम है।

राष्ट्रगान कार्यक्रम के संस्थापक प्रेमलाल साहू बताते हैं कि 26 जनवरी 2018 को शुरू की गई इस पहल को लेकर ग्रामीणों का सहयोग लगातार मिलता रहा। यही वजह है कि वर्षों बाद भी परंपरा बिना किसी रुकावट के जारी है।

समाजसेवी चंद्रशेखर साहू का कहना है कि श्यामनगर की यह पहल नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। देशभक्ति को केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में उतारना इस परंपरा की खासियत है।

व्यवसायी प्रमोद कुमार साहू के अनुसार, सुबह 9 बजे राष्ट्रगान की आवाज सुनते ही बाजार और गांव का माहौल कुछ क्षणों के लिए पूरी तरह बदल जाता है। लोग अपने काम रोककर राष्ट्रगान का सम्मान करते हैं, जिससे गांव में एक अलग तरह की सामूहिक भावना देखने को मिलती है।

वहीं, 2018 में सरपंच रहे प्रकाश चंद साहू सहित ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल ने श्यामनगर को एक अलग पहचान दी है। यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक जारी रहनी चाहिए, ताकि बच्चों में देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना मजबूत बनी रहे।

श्यामनगर की पहचान बन चुकी परंपरा

श्यामनगर में पिछले आठ वर्षों से हर सुबह राष्ट्रगान के साथ दिन की शुरुआत होना अब महज एक कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह गांव की सामूहिक पहचान और गौरव का हिस्सा बन चुका है। राष्ट्रगान की धुन बजते ही हर व्यक्ति का अपने स्थान पर रुक जाना यह संदेश देता है कि राष्ट्र के प्रति सम्मान किसी खास दिन तक सीमित नहीं, बल्कि हर दिन की भावना हो सकती है।

26 जनवरी 2018 को शुरू हुई यह छोटी-सी पहल आज श्यामनगर की एक ऐसी परंपरा बन गई है, जिसकी चर्चा गांव से बाहर भी होने लगी है। देशभक्ति, अनुशासन और एकता का यह अनूठा प्रयास निश्चित रूप से दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!