वर्ष 2005 में वरिष्ठता क्रमांक 14 से 1 होने की सूक्ष्म जांच की मांग, रिटायरमेंट के बाद भी एमडी की कुर्सी पर हैं काबिज
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड में प्रबंध संचालक महेंद्र सिंह सवन्नी की संविदा नियुक्ति और उनकी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर संविदा नियुक्ति निरस्त करने और पूरे प्रकरण की सूक्ष्म जांच कराने की मांग की है। 25 सितंबर 2026 को लिखे गए पत्र में बघेल ने सवन्नी की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े तथ्यों की जांच की आवश्यकता जताई है।
भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया है कि मंडी एवं मंडी बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों की ओर से उन्हें आवेदन और अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें महेंद्र सिंह सवन्नी की संविदा नियुक्ति निरस्त करने की मांग की गई है। पत्र में विशेष रूप से वर्ष 2005 की पदोन्नति प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सवन्नी ने वरिष्ठता क्रमांक 14 से क्रमांक 1 तक वरिष्ठता प्राप्त की थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बदलाव की परिस्थितियों और प्रक्रिया की सूक्ष्म जांच कराने की मांग की है।
गौरतलब है कि सवन्नी ने वर्ष 1985-86 में मंडी बोर्ड में सचिव वर्ग ‘द’ से अपनी सेवाएं शुरू की थीं। जून 2024 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे संविदा नियुक्ति के जरिए प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस नियुक्ति को लेकर विभाग के भीतर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि लंबे समय से उनकी पदोन्नति और पदस्थापना को लेकर विभागीय स्तर पर असंतोष बना हुआ है।
अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चा
मंडी बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की नाराजगी भी अब खुलकर सामने आने लगी है। अधिकारियों की ओर से कृषि मंत्री को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और दूरदराज के क्षेत्रों में तबादले की धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने संविदा नियुक्ति समाप्त कर नियमानुसार योग्य अधिकारी को प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी देने की मांग की है।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
मंडी बोर्ड में पिछले कई वर्षों के दौरान कृषि मंत्री और प्रबंध संचालक बदलते रहे, लेकिन सवन्नी की विभाग में मौजूदगी और प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व मुख्यमंत्री के पत्र और अधिकारियों-कर्मचारियों के ज्ञापन के बाद मामला सरकार के संज्ञान में है। कर्मचारियों ने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी है। ऐसे में देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में जांच कराती है या संविदा नियुक्ति को लेकर कोई निर्णय लेती है।
