00 सरकारी दस्तावेजो मे कैश बुक – बिल बाउचर सहित नियुक्ती से संबधित द्स्तावेज अाज भी गायब
00 वर्ष २०११ में चिकित्सा विभाग कोरिया मे 76 स्वास्थ कर्मियो कि भर्ती मे गड़बड़ी
00 लिपिक जेम्स बेक को निलंबन किया गया था फिर अब निलंबन अवधि में ज्वाइन
कोरिया / कोरिया जिले का चर्चित स्वास्थ विभाग मे 76 स्वास्थ कर्मियो कि भर्ती घोटाले मामले में दोषी व फरार बाबू जेम्स बेक ने वापसी करते हुए मुख्यालय पटना सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में निलंबन अवधि में ज्वाइन किया है, जहा शासन से अब इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता भी मिलेगी। अभी हाल में जीवन निर्वाह भत्ता को लेकर शासन स्तर पर आवेदन दिया था जिस आधार पर उसने निलंबन अवधि में निर्धारित मुख्यालय पटना में ज्वॉइन किया है जहा वे रोज आये ये जरूरी नहीं । पिछले लगभग 03 वर्षो बाद फरार बाबू जेम्स बेक की वापसी कई सवाल खड़े कर रही है जिसका जबाब अाज न स्वास्थ विभाग के पास है और न ही पुलिस विभाग के पास।
क्या था पूरा मामला –
वर्ष २०११ में चिकित्सा विभाग कोरिया मे 76 स्वास्थ कर्मियो कि भर्ती को कई खामियां के बाद भी हरी झंडी दी गई थी जो निम्न प्रकार है –
१. अारक्षण रोस्टर का पालन नहीं हुआ था
२. विभागीय भर्ती नियम का पालन नहीं किया गया
३. नियुक्ति के दोरान संचनालय के निर्देश क्रमांक नर्सिंग /२००८/४९२ दिनांक ८/४/२००८ का पालन नहीं किया गया
४. नियुक्ति के दौरान रोजगार कार्यालय से सूचि एवं लोक विज्ञापन एक साथ जारी कर दिया गया जो कि एक गंभीर त्रुटि है
५. उक्त भर्ती प्रक्रिया में भर्ती कि शर्ते,योगयता ,रिक्तियों कि वर्ग वार संख्या ,वेतन इत्यादि का उल्लेख नहीं किया गया
६. सम्भावित अभ्यर्थियो को केवल एक दिन का समय दिया गया इसके साथ कॉउंसलिंग के दौरान किसी भी अभ्यर्थी को व्यक्तिगत सुचना नहीं दी गई
७. नियुक्ति का आदेश अलग अलग तिथियों में प्रत्येक अभ्यर्थी को अलग अलग जारी किया गया
८. नियुक्ति का आदेश अभ्यर्थियो के हाथो में सौपा गया ना कि पोस्ट से उनके घर तक पहुच्या गया
९. नियुक्ति आदेश के बाद सभी अभ्यर्थियो ने आदेश के दिन ही विकासखंड और सेक्टर में अपनी उपस्तिथि दी जो कि सम्भव नहीं
१०. नियुक्ति आदेश जावक में कांट छांट कि गई
११. जावक पंजी में कई जगहो में रिक्त स्थान
१२. जावक पंजी में नियुक्ति आदेश का इंद्राज नहीं
१३. एक ही जावक नंबर पर एक से अधिक नियुक्ति आदेश जारी।
उक्त त्रुटिओ के बावजूद 76 लोगो को स्वास्थ्य कर्मी कि नियुक्ति प्रदान कर दी गई थी, नियुक्ति के बाद कुछ लोगो ने अपना मुह खोला तो मामला सुर्खियो में आया और यह वे लोग थे जिन्होंने आकाओ को प्रसाद तो चढ़ाया था लेकिन उन्हें फल नहीं मिल पाया. मामले को तुल पकड़ता देख सर्वप्रथम मंत्री के चहेते अधिकारी तत्कालीन chmo को सरगुजा भेज दिया गया जहा पर उन्हें संयुक्त संचालक के पद पर आसीन कर दिया गया साथ ही उनके चहेते बाबू जेम्स बेग को अंडर ग्राउंड कर दिया गया था लेकिन जेम्स ने जाते – जाते समस्त सरकारी दस्तावेजो मे कैश बुक – बिल बाउचर सहित नियुक्ती से संबधित द्स्तावेज को भी गायब कर दिया था। जिसका अाज तक नही पता चल पाया।
धीमी जांच और रिकार्ड भी नही मीले – चर्चित स्वास्थ विभाग नियुक्ति घोटाले मामले मे जांच के दौरान तत्कालीन जिला प्रशासन ने तीन लोगो को दोषी पाया था जहा शासन स्तर पर कार्यवाही की अनुशंसा की गई थी किन्तु अब तक क्या कार्यवाही हुई इस सम्बन्ध में किसी को कोई जानकारी नहीं है वही स्वास्थ विभाग ने जिला प्रशासन के निर्देश पे fir भी करवाया था जो अाज तक पुलिस नहीं कर पाई है वही इस बाबू के द्वारा जो कैस बुक व नियुक्ति से सम्बंधित दस्तावेज व बिल बाउचर आज तक स्वास्थ विभाग में जमा नहीं किये गए है वही जानकारों का मानना है की यदि दस्तावेज जमा हो जाये कई और भी अधिकारियो पर गाज गिर सकती है गायब रिकार्डो को जेम्स बेक से अभी तक नही लिया गया है।
मामले मे कई राज दफन – जेम्स के जरिये ही तत्कालीन मुख्य़ चिकित्सा अधिकारी अपने काले कारनामो को अंजाम देता था और सारे पैसो का लेनदेन उसी के मार्फ़त हुआ करता था। मामला सुर्खियो में आने के बाद इसकी जाँच के आदेश कलेक्टर कोरिया ने दिए जिसमे ३१ मई २०१२ को तत्कालीन अपर कलेक्टर धर्मेश साहू ने अपनी जाँच रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य़ चिकित्सा अधिकारी को लिपिक जेम्स बेग सहायक ग्रेड २ एवं जिला रोजगार अधिकारी मनेन्द्रगढ़ एस के भर्वे को प्रमुख रूप से दोषी पाये गए जिसके बाद ८ जून २०१२ को नियुक्त ७६ स्वास्थ्य कर्मियो कि नियुक्ति को निरस्त कर दिया गया लेकिन मई २०१२ के सरकारी आदेश क्रमांक F/9/127/2012 /9 और नियुक्ति निरस्ती करण आदेश क्रमांक 167 /स्था/2012 8 june के बावजूद उन दोषी अधिकारियो पर क्या कार्यवाही हुई ।
जेम्स जांच मे नही दिए थे साथ – तत्कालीन कलेक्टर कोरिया ने जेम्स को जांच के दौरान दो बार नोटिस भेजा था जिसमे जेम्स पेश नहीं हुए थे जिसके बाद अधिकारियो ने पूरी फ़ाइल राज्य शासन को भेज दी थी जिस पर आज तक कोई जवाब नहीं आया।
एस एल चावड़ा chmo कोरिया – नियुक्ति में गंभीर अनियमितताओं के कारण लिपिक जेम्स बेक को निलंबन किया गया था व शासकीय रिकार्ड लेकर फरार था जिस कारण पुर्व में जिला प्रशासन के निर्देश पर fir करवाया गया था किन्तु अब तक कोई रिकार्ड जमा नहीं हुआ है अभी हाल में जीवन निर्वाह भत्ता को लेकर शासन स्तर पर आवेदन दिया था जिस आधार पर उसने निलंबन अवधि में निर्धारित मुख्यालय पटना में ज्वॉइन किया है जहा वे रोज आये ये जरूरी नहीं ।
के एस राठिया थाना प्रभारी सिटी कोतवाली बैकुण्ठपुर – उक्त मामला पुराना है जिस सम्बन्ध में जानकारी रिकार्ड देखने के बाद ही दी जा पायेगी।
