रायपुर, 30 अप्रैल।
प्रदेश में अवैध रेत खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टरों को स्पष्ट चेतावनी दी है। खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित कलेक्टरों व अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, सक्ती, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-बैकुंठपुर, बलरामपुर और कांकेर जिलों के कलेक्टरों की बैठक लेकर रेत खदानों के संचालन और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की गई।
बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रदेश में रेत की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी न हो। स्वीकृत खदानों से उनकी क्षमता के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित किया जाए और आम जनता को उचित दर पर रेत उपलब्ध कराई जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी मुक्त रेत उपलब्ध कराने के निर्देशों का भी कड़ाई से पालन करने को कहा गया है, ताकि इसकी आड़ में अवैध गतिविधियां न हो सकें।
समीक्षा के दौरान गरियाबंद, कांकेर और जांजगीर-चांपा जिलों में नीलामी प्रक्रिया में बेहतर प्रगति पाई गई, जबकि धमतरी, बिलासपुर और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-बैकुंठपुर में धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई गई। संबंधित जिलों को शीघ्र नीलामी प्रक्रिया तेज करने और खनन योजना व पर्यावरण स्वीकृति की कार्रवाई प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
सचिव ने अवैध खनन वाले क्षेत्रों का चिन्हांकन कर लगातार कार्रवाई करने तथा शिकायतों व मीडिया रिपोर्ट्स पर त्वरित संज्ञान लेने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि केंद्रीय उड़नदस्ता को किसी जिले में कार्रवाई करनी पड़ती है, तो इसे जिला प्रशासन की लापरवाही माना जाएगा।
उन्होंने दो टूक कहा कि यदि किसी भी जिले में ड्रोन सर्वे या जांच में अवैध खनन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कलेक्टर और खनिज अधिकारी इसके लिए सीधे जिम्मेदार होंगे।
