बैकुंठपुर/ शोभायात्रा के दौरान रास्ता रोके जाने के कारण चरचा काॅलरी में दो समुदायों में हुए विवाद के चलते बुधवार को जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में दिनभर तनाव की स्थिति रही। कई बार पुलिस व जनता के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। इस घटना के विरोध में बैकुंठपुर, पांडवपारा, चरचा कॉलरी के सभी व्यावसायिक प्रतिश्ठान स्वस्फूर्त बंद रहे। वहीं दोपहर में रैली निकालकर भारी संख्या में लोगों ने मामले में शामिल लोगो के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर थाने का सांकेतिक घेराव कर दिया। तनाव को देखते हुए बुधवार को एक समुदाय ने ताजिया का मातमी जुलुस भी नहीं निकाला। इस पूरे मामलें में दोनों समुदायों के साथ आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिला मुख्यालय घड़ी चौक में देर शाम तक लोग डटे रहे। जिसके चलते पुलिस को कई बार लोगों को हटाने हल्का बल का प्रयोग भी करना पड़ा।
विदित हो कि मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर हिन्दूवादी संगठनों के द्वारा भगवान श्री राम की भव्य शोभायात्रा निकाली गई थी। उक्त शोभायात्रा बैकुण्ठपुर के बाद चरचा काॅलरी पहुंची जहां उसे राम मंदिर तक जाना था। किंतु रास्ते में मस्जिद् होने के कारण कुछ लोगों के द्वारा उक्त मार्ग को बेरीकेट्स लगाकर बंद कर दिया गया था जिसके चलते दोनो समुदायों में विवाद की स्थिति पैदा हो गई। इसी बीच चरचा कॉलरी में हुए विवाद के दौरान पथराव हो गया था। जिसमें पुलिसकर्मी सहित लगभग आधा दर्जन लोग घायल हो गये थे। इस दौरान एक समुदाय के लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के भी नारे लगाए थे। वहीं हवा में दोनों ओर से हथियार भी लहराए गए थे। पुलिस द्वारा हालात को काबू में करने आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे। देर शाम कलेक्टर व एसपी की समझाइश के बाद विशेष समुदाय के लोगों ने शोभायात्रा को जाने का रास्ता दिया था। इस मामले में पुलिस द्वारा उन्हें हरसंभव मदद देने की बात कही गई थी। कल रात तक मामला तो कुछ देर के लिए शांत हुआ, लेकिन इसी बीच चरचा काॅलरी में आगजनी की घटना हो गई जिसमें मटन मार्केट की दुकानें जलकर भस्म हो गई। घटना के दूसरे दिन एक समुदाय के लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के विरोध में बुधवार को चरचा कॉलरी, बैकुंठपुर व पांडवपारा शहर पूरी तरह से बंद कर दिया। यहां तक की व्यापारियों ने मेडिकल जैसी अतिआवश्यक सेवा की दुकानें भी बंद रखी हैं। स्थानीय प्रेमाबाग में इस घटना को लेकर घंटो मैराथन बैठक चली। बैठक के बाद रैली की शक्ल में भारी संख्या में एक समुदाय के लोगों ने नारे लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बैकुंठपुर थाने में ज्ञापन दिया। पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ी संख्या में पहुंचे व्यापारियों व लोगों ने बैकुंठपुर थाने का घेराव कर दिया। करीब डेढ़ घंटे से थाने के बाहर लोगों का हुजूम डटा रहा। वहीं पुलिस लाईन में कलेक्टर एस प्रकाश व पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार ने दोनों पक्षों के साथ शहर के वरिश्ठ नागरिकों की उपस्थिति में बैठक ली। किंतु बैठक में कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला तत्पष्चात् लोग भारी संख्या में घड़ी चौक में एकत्रित हो गए। टकराव की स्थिति को देखते हुए एक समुदाय ने मोहर्रम का मातमी जुलुस नहीं निकालनें का फैसला किया। हालाकि जुलुस निकालनें पर प्रशासन ने उन्हें पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था का आष्वासन दे रखा था। इन सबके बीच देर शाम तक घड़ी चौक में लोगों का हजारों की संख्या में जमावाड़ा लगा रहा। टकराव की स्थिति को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। बाद में पुलिस ने बल प्रयोग करके सभी प्रदर्षनकारियों को घड़ी चौक से खदेड़ दिया। जनचर्चा कि बड़ी बात यह है की प्रशासनिक चुक के कारण चरचा व बैकुण्ठपुर का आपसी सौहार्द पूर्ण वातावरण कड़वाहट में बदल गया।
दरअसल आयोजकों ने शोभायात्रा निकालनें के पूर्व प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था जिसमें बैकुण्ठपुर व चरचा के रूट चार्ट का स्पश्ट उल्लेख था। बावजूद इसके चरचा काॅलरी में समुदाय विषेश द्वारा बांस बल्ली लगाकर उक्त मार्ग को अवरूद्ध कर दिया गया। जिससे होकर शोभायात्रा को गुजरना था। जबकि उक्त स्थल संवेदनशील था तथा प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिसबल को शोभायात्रा के पूर्व मौके पर तैनात रहना था। किंतु ऐसा नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि बिना किसी अनुमति के उक्त सार्वजनिक मार्ग को कैसे अवरूद्ध किया गया। इसकी सूचना प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को दिए जाने के बाद भी समय रहते अवरूद्ध मार्ग को चालु नहीं कराया गया जिसके चलते घंटो विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। साथ ही दोना समुदाय के बीच विवाद की खबर मिलनें के बावजूद लगभग पांच घंटे तक जिले का कोई भी जिम्मेदार प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और ना हीं किसी ने विवाद की स्थिति को टालने का प्रयास किया। इसके अलावा पूरे घटनाक्रम का उल्लेखनीय पहलु यह भी है कि टकराव की स्थिति व लोगो के हुजुम को देखते हुए प्रशासन चाहता तो संवेदनशील व संबंधित क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर सकता था। किंतु ऐसा नहीं किया गया और इसके चलते लोगों को मनमानी करने का अवसर मिल गया।
