चिरीमिरी स्थाईत्व व नविन उद्द्योग हेतु आमरण अनशन पर बैठे सुभाष देवनाथ
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इतिहास में कोयला खान – चिरमिरी खदान सन् 1928 में मेसर्स डागा, कुरासिया खान सन् 1932 में, रेल्वे एन0सी0पी0एच0 खान सन् 1941 में दादा भाई , नार्थ चिरमिरी खान सन् 1946 में श्री के0सी0 थापर, वेस्ट चिरमिरी खान सन् 1950 में इंदर सिंह और कोरिया डोमनहील खान सन् 1962 में एन0सी0डी0 जैसे निजी मालिको ने खदानों को खोलकर राष्टीयकरण के पूर्व श्रमिकों से बधुआ मजदूर जैसे बल पूर्वक कोयले का दोहन किया और धन संपत्ति अर्जित कर यहां से पलायन किया। उन दिनों श्रमिक आंदोलन या श्रमिक संगठन प्रायः नही के बराबर थे। अब एतिहासिक पृष्ट भूूमि के बाद वर्तमान की स्थिति पर जब हम गौर करें तो आप को यह भी साफ दिखाई पड़ेगा की उस समय से आज एस0ई0सी0एल0 अधिकारियों ने क्षेत्र का बस दोहन ही किया है अनाब सनाब और टारगेट पूरा कर दिखाने तथा प्रमोशन की फिराक में शहर के रहवासी श्रमिकों के लिएं बिलकुल भी नही सोचा।