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13 साल बाद भी चेर हत्याकांड के 03 आरोपी फरार, उनके गिरेबां तक नही पहुँच पाई कोरिया पुलिस

00 सवाल,,, आखिर कितने लंबे है पुलिस के हाथ

कोरिया / कोरिया जिला मुख्यालय से सटे लगभग 05 किलोमीटर दुर स्थित ग्राम चेर में वर्ष 2004 में घटी घटना आखिर किसको याद नही। जिले ही नही संभाग और प्रदेश में इस घटना ने अपनी दर्दनाक छाप छोड़ दी थी। जहां इस घटना से एक ही रात व समय मे एक ही परिवार के 05 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस घटनाक्रम को अंजाम देने वाले कुल 06 आरोपी थे घटना के बाद 03 आरोपी तो पुलिस ने पकड़े पर आज भी घटना के 03 आरोपी पुलिस गिरिफ्त से बाहर है।

मामले में फरार आरोपी –
01 – तुलाराम आ. ताना सिंह
02 – जंग सिंह आ. केशर सिंह
03 – मंगल सिंह आ. ज्ञानी सिंह

गिरिफ्तार आरोपी –
01- सोनु सरदार आ . ज्ञानी सिंह
02- फोटो उर्फ अजय सिंह आ. ज्ञानी सिंह
03- छोटी बाई पति ताना सिंह
यह आरोपी 29/11/2014 को गिरिफ्तार हुए थे।

इस पुरे मामले में आरोपी सोनु सरदार का चेहरा काफी चर्चित रहा है वह इसलिए कीसोनू सरदार को फांसी की सजा सुनाई गई थी खैर अब उसे भी आजीवन कारावास में बदल दिया गया है।

जानिए सोनु को कब-कब मिली सजा –

23 फरबरी 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सोनू की फांसी की सजा बरकरार रखी…..
जून 2013 में राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका पेश की गयी…..
27 मार्च 2014 को गृह मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी भेजी…..
5 मई 2014 को राष्ट्रपति ने दया याचिका खरिज कर दी….
उसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई…
दिल्ली हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया….

ये था घटना क्रम –
कोरिया जिले में 26/11 की वो काली रात जब एक परिवार के 05 लोगो के मौत का कारन बनी। लुट की वारदात को अंजाम देने के लिए सोनू सरदार और उसके साथी साजिश के तहतर 26 /11 की रात 08 बजे कबाड़ व्यवसायी शमीम अख्तर के घर पहुचे। सोनू सरदार और उसके साथियों को इस बात का इल्म था की शमीम अख्तर 26 /11 को रायपुर से कबाड़ बेच कर लौटा है । कबाड़ का पैसा लगभग 1 लाख 75 हजार रु0 शमीम अख्तर सिर्फ इसलिए नहीं जमा कर सका क्योकि उस दिन बैंक का अवकास था। घटना को अंजाम देने की साजिश के तहत पहुचे सोनू सरदार और उसके साथी कबाड़ बेचने को आधार बनाकर घर में दाखिल होते है। क्योंकी लुट की वारदात को अंजाम देना था इसलिए सबसे पहले बातो ही बातो में यह पता किया जाता है की कबाड़ बेचकर आने की बात में कितनी सच्चाई। जैसे ही यह बात स्पष्ट होती है की घटना दिवस यानि 26 नवम्बर 2004 को ही कबाड़ व्यवसायी कबाड़ बेचकर आया है तो पैसा घर में होने की बात को बातो ही बातो में उगलवाया जाता है और यही से शुरू होती है पहले लुट फिर 05 लोगो की सिलसिलेवार मौत का खुनी खेल। घटना को अंजाम देने वाले तब तक नहीं रुके जब तक एक परिवार के 05 लोग मौत के नीद नहीं सो गये। कातिलो ने मन लिया की घर के एक – एक सदस्य को मौत की नीद सुला दिया गया है पर कहते है न की मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है। घर का एक सदस्य शमीम अख्तर की 10 वर्षीय लड़की कातिल की नजरो से बचकर भागने में सफल रही जो बाद में कातिलो तक पुलिस को पहुचने में सहायक हुआ।

Sp korea vivek shuklaविवेक शुक्ला, पुलिस अधीक्षक कोरिया – मेरे जानकारी में यह बात लाई गई है कि इसमें कुछ आरोपी अभी भी फरार है तो इसकी डायरी में अध्यन करके गिरफतारी के लिए आगे प्रयास किये जायेंगे।

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