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जनरक्षा यात्रा – विरोध के बावजूद केरल में नहीं थमी राजनीतिक हिंसा

केरल / विरोध के बावजूद केरल में नहीं थमी राजनीतिक हिंसा केरल में जारी हिंसा के ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी 3 अक्टूबर से जनरक्षा यात्रा निकालकर केरल की वामपंथी सरकार के ख़िलाफ आंदोलन चला रही है।

इसी कड़ी में दिल्ली बीजेपी ने भी दिल्ली के तमाम जिलों की अलग-अलग यात्रा निकाल कर विरोध जता रही है। मंगलवार को केन्द्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के नेतृत्व में आरामबाग से सीपीएम दफ्तर गोल मार्केट तक जनरक्षा यात्रा निकाली गई।

केरल में जारी हिंसा के ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी 3 अक्टूबर से जनरक्षा यात्रा निकालकर केरल की वामपंथी सरकार के ख़िलाफ आंदोलन चला रही है। मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी जनरक्षा यात्रा में शामिल होने के लिए केरल पहुंचे। वो मनुथ्थे से त्रिशूर तक पदयात्रा में शामिल हुए। बाद में उन्होंने वड्डकनचेरी और त्रिशूर में आमसभा को संबोधित करते हुए केरल के मुख्यमंत्री विजयन पर सीधा हमला बोला, उन्होंने कहा कि उनके ऊपर भी हत्या के आरोप हैं।

मंगलवार को केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह भी केरल में पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि केरल में राजनीतिक हिंसा में अभी तक करीब 250 लोग मारे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए राज्य में की जा रही हत्याओं को भारतीय जनता पार्टी स्वीकार नहीं करेगी।

मंगलवार को ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे के नेतृत्व में भी आरामबाग से सीपीएम दफ्तर गोल मार्केट तक जनरक्षा यात्रा निकाली गई। गौरतलब है कि केरल में कम्युनिस्टों द्वारा भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या के विरोध में बीजेपी देश भर में अलग-अलग यात्रा निकाल कर विरोध जता रही है। हालांकि राजनीतिक हिंसा का सिलसिला जारी है। राज्य के कन्नूर जिले के थालास्सेरी में एक भाजपा कार्यकर्ता पर मंगलवार दोपहर को हमला हुआ। हमले के बाद भाजपा कार्यकर्ता और ऑटो-रिक्शा चालक सुरेश सुधीश को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना थालास्सेरी में स्थित पोन्नियम पुल के पास हुई। भाजपा ने सीपीआईएम पर कार्यकर्ता पर हमले करने का आरोप लगाया है। पुलिस इस घटना की जांच कर रही है। गौरतलब है कि साल 2001 के बाद से केरल में 120 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है, जिनमें से 84 केवल कन्नूर में ही मारे गए हैं। इनमें से 14 की मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के गृहनगर पिनराई में ही हत्या की गई।

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