कोरिया / बैकुन्ठपुर से अनुप बड़ेरिया की रिपोर्ट— –
कड़ाके की ठंड में कोरिया जिला कांग्रेस में एक बार फिर गर्माहट सी हो गयी है। इस बार गर्माहट कांग्रेस को किसी मुद्दे से नही बल्कि राजपरिवार की वंसज श्रीमती अम्बिका सिंहदेव उर्फ बेबी सहिबा के तूफानी दौरे से हो रही है। पिछले चार दिनो से लगातार बैकुन्ठपुर विधानसभा के दौरे ने कांग्रेसी दावेदारो के माथे में चिंता की लकीरे खड़ी कर दी है। वहीं शनिवार को उन्होनें बैकुन्ठपुर शहर का भ्रमण कर स्थानीय लोगो से मुलाकात भी की। आपको बता दे कि एक साल में उनका यह तीसरा दौरा है। जिससे अब उनके बैकुन्ठपुर विधानसभा से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने के संकेत को साफ – साफ देखा व महसुस किया जा सकता है।
गौरतलब हो कि शांत, शालीन मृदुभाषी व सौम्य व्यवहार, हर वाक्य को नाप तौल कर बोलने की कला, सादगी का समावेश लगता ही नही है कि यह महिला किसी राज परिवार से संबंध रखती होगीं। जी हां हम बात कर रहे है कोरिया राजपरिवार की राजकुमारी श्रीमती अम्बिका सिंहदेव की। जो मप्र, छग में मंत्री व 6 बार बैकुण्ठपुर से विधायक रहे डां रामचंद्र सिंहदेव की भतीजी है। उनसे बातचीत करने पर कहीं से भी नही लगा कि उनका राजनीति के क्षेत्र में यह पहला कदम हो। उन्होनें साफ कहा कि उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला काका साहब याने कोरिया कुमार ही करेगे। उन्होने बताया कि उनका यह दौरा कोई राजनीतिक दौरा नही है। बल्कि उनके दादाओ के जमाने से इस क्षेत्र की जनता से लगाव है। मेरा बचपन भी यहीं बीता, कोलकता में शादी के बाद भी वह साल में एकाध चक्कर बैकुण्ठपुर का लगा ही लेती है। जिससे क्षेत्र की जनता से उनका जुड़ाव लगातार बना हुआ है। कोलकता में हैंडी का्रफ्ट व इंटीरियर डेकोरशन का व्यवसाय जमाने व दोनो बच्चो के अमेरिका में व्यवस्थित हो जाने के बाद श्रीमती अम्बिका ने अब कोरिया की राजनीति में आने का वक्त निकाल ही लिया है। हालांकि उन्होनें बैकुन्ठपुर विधानसभा से चुनाव लड़ने की संभावानाओ पर न तो खुल कर हां ही की और न ही… उसे एक सिरे से खारिज भी नही किया। कुल मिला कर कोरिया कुमार के निर्णय पर ही उनका राजनीतिक भविष्य का फैसला होना तय है। फिलहाल अम्बिका सिंहदेव बैकुन्ठपुर विधानसभा के विभिन्न ग्रामीण अंचलो का दौरा कर पुराने पैलेस के वफादार व कांग्रेसियो से मुलाकात कर अपनी जमीन टटोलने में लगी है। यहां बताना लाजिमी भी होगा कि पूर्व केंन्द्रीय मंत्री डां. चरणदास महंत व अम्बिका सिंहदेव के दादा भाई व नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव का भी औपचारिक आर्षीवाद उन्हे मिल चुका है। कड़ाके की ठंड में यदि श्रीमती अम्बिका गांव-गांव जा रही है तो यह केवल इत्तेफाक या लोगो से केवल मुलाकात हाल चाल पूछना तो नही हो सकती। इसे हर वह आदमी राजनीतिक चश्मे से ही देखेगा। जिसे राजनीति की थोड़ी भी समक्ष है। इस संबंध में कुछ पुराने कांग्रेसियो से हमने बात की तो उन्होने कहा कि बैकुन्ठपुर की जनता ने जिस प्रकार राजमहल के कुमार डां़ रामचंद्र सिंहदेव को हाथो हाथ लिया व 6 बार विधायक बनाया। उसी प्रकार यहां की जनता कोरिया पैलेस की वंसज को भी सर माथे पर बैठाएगी। यही नही दावेदारो के बीच गुटबाजी में बटी कांग्रेस एक हो जाएगी व भारी मतों से जीतने की संभावना बढ़ जाएगी। वहीं कुछ युवा कांग्रेसियो का मानना है कि बाहर से ला कर नया चेहरा थोपना कांग्रेस के लिए घातक हो सकता है और जो दिग्गज नेता पार्टी की इतने वर्षो से सेवा कर रहे है वह पार्टी भी छोड़ सकते है जो कांग्रेस के लिए नुकसान का सौदा साबित होगा।
उल्लेखानीय है कि कांग्रेस से योगेश शुक्ला, वेदांती तिवारी व अशोक जायसवाल इस बार विधानसभा टिकट के लिए प्रबल दावेदार है। परंतु श्रीमती अम्बिका सिंहदेव के दौरे के बाद इनके चेहरो पर एक अजीब सा सन्नाटा देखा जा सकता है। अब पैलेस के पुनः सामने आने पर अब केवल कट्टर कांग्रेसी ही चार्ज रहेगे व गुट विशेष वाले राजनीति में ठंडे पड़ जाएगें। वैसे भी यदि कहीं अम्बिका देवी चुनाव लड़ गयी तो वह हारे या चुनाव जीते बाकी कांग्रेसी दावेदार 15 साल फिर पीछे हो जाएगे। कुल मिला कर अब प्रबल दावेदारो की टिकट पर जो संदेह चल रहा था वह अब यकीन में बदल जाएगा। वहीं कई कांग्रेसियो का मानना है कि भाजपा के वर्तमान विधायक व छग सरकार में मंत्री भईयालाल राजवाड़े को केवल राजपरिवार का ही सदस्य हरा सकता है। इसलिए अम्बिका सिंहदेव एक हिसाब से कांग्रेस की सही पसंद हो सकती है। वहीं कई कांग्रेसी अब यह भी कह रहें है कि जब बाहर से थोपे गए कंडीडेट को कांग्रेसी ही नही स्वीकार कर पाएगें तो जनता कहां से स्वीकार करेगी। वहीं भाजपाई भी सोशल मीडिया में चुटकी ले रहे है कि कांग्रेस को कोई और नही मिला तो पैराशुट कंडीडेट लांच कर रहे है। कुल मिला कर लग यह रहा है कि इस बार बैकुन्ठपुर विधानसभा में राजवाड़े और राजमहल के बीच जबरजस्त जंग हो सकती है।
