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यहाँ होती है ‘दानव बकांसुर’ की पूजा, चढ़ती है मदिरा, हर मन्नत होती है पूरी, देखें वीडियों आप भी करें दर्शन…

** चढ़ती है मदिरा और दी जाती है बकरे की बलि
** खोपा देवता के नाम से प्रसिद्ध है यह धाम
** हर मन्नत होती है पूरी
** महिलाओं को यहां चढ़ा प्रसाद खाने की नहीं है इजाजत

सूरजपुर / देवी-देवताओं की पूजा तो हम सभी करते हैं, लेकिन क्या कभी आपने यह सुना है की आज के आधुनिक दौर में भी लोग दानव की पूजा करते हैं।

आप भी दर्शन… देखें वीडियों …

यकीं मानिए … आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही एक गांव के बारे में जहां के लोग प्रतिदिन दानव की पूजा करते हैं। इसे खोपा धाम के नाम से जाना जाता है। यही नहीं इस धाम में आस-पास के गांवों के अलावा प्रदेशभर के लोग भी अपनी मन्नत लेकर आते हैं। इस धाम के बारे में कहा जाता है कि सच्चे दिल से यहां मांगी गई हर मुराद भी पूरी होती है। छत्तीसगढ़ राज्य के सूरजपुर जिले में यह गांव स्थित है। यहां के लोग बकांसुर दानव के प्रति आस्था रख कर नित्य पूजा-अर्चना के लिए जाते है और मन्नत पूर्ण होने पर दानव के दरबार में चढ़ावा भी चढ़ाते है। चढ़ावे के रूप में लोग यहां मदिरा और बकरे की बलि देते हैं। 

आपको बता दे कि सूरजपुर से महज 13 किलो मीटर की दूरी पर खोपा गांव में दानव धाम स्थित है। अनादि काल से ही यहां विराजमान दानव की प्रतिमा को खोपा देवता के नाम से पूजा जाता है। खुले मैदान में प्राचीन पत्थर की इस प्रतिमा में दानव का चेहरा निर्मित है। यहां दानव से मन्नत मांगने वालों के साथ ही पूर्ण होने पर भक्त बकरा और देशी शराब लेकर यहां पंहुचते है और बैगा के माध्यम से मन्नत पूरी होने पर चढा़वे को स्वीकार करने की अपील हेतु पुजा अर्चना की जाती है। दानव की पूजा-अर्चना पूर्वजों के जमाने से करते आ रहे बैगा की अपील का भी अपना अलग अंदाज है। बैगा बताते कि यहां विराजमान दानव पाताल से नदी के माध्यम से ऊपर आये थे, जिन्हें दो बैगा मिलकर लाये थे।

खोपा देव
अन्य देव स्थल भी है आस्था का केंद्र –

यहां बंकासुर देव के साथ ही खोपा दाई, बूढ़ी माई, जलहल देवता, कुदरगढ़ी दाई, छुरीपाट और शंकरपाट की मूर्तियां स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती हैं। 

महिलाएं नही खा सकती प्रसाद –

बताया जाता है की यहाँ के नियम अनुसार यहां चढ़े प्रसाद को खाने की महिलाओं को बिलकुल भी इजाजत नहीं है और मन्नत मांगने वाले पूरा होने से पहले धाम नहीं पहुंच सकते। प्रसाद के रूप में चढ़े बकरे को घर नहीं बल्कि वहीं खुले मैदान में बनाकर सेवन करना होता है।

अजीबो गरीब है परंपरा –

देवस्थल पर बंकासुर के लिए बकरों और मुर्गो की बलि दिए जाने और प्रसाद के तौर पर शराब चढ़ाए जाने की भी परंपरा है। लोग यहां मन्नत के लिए नारियल और चुनरी भी बांधते हैं और पूरी होने पर उसे खोला जाता है।
खोपा देव सुरजपुर

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