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छत्तीसगढ़ के “माउंटेन मैन” राहुल एवरेस्ट चढ़ाई के लिए रवाना, चोटी पर लहराएंगे परचम, राष्ट्रपति कोविंद तिरंगा भेंट कर दी शुभकामनाएं

रायपुर / कहते हैं अगर आपके अंदर आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता, अपने इन्हीं इरादों और हौसले से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में रहने वाले 23 वर्षीय युवा “माउंटेन मैन” के नाम से चर्चित राहुल गुप्ता माउंट एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचकर प्रदेश का गौरव बढ़ाने के लिए रवाना हो गए हैं. उनके इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए देश के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी राष्ट्रपति भवन में फ्लैग ऑफ करते हुए उन्हें तिरंगा भेंट कर सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी है.

उनके मनोबल को बढ़ाने और इस यात्रा को सफल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है. क्षेत्र के सांसद कमलभान सिंह मरावी के नेतृत्व तथा जिला प्रशासन सरगुजा के सहयोग में राहुल 6 अप्रैल को दोपहर स्वामी विवेकानंद विमानतल से रवाना हो चुके हैं.

एवरेस्ट का पहला सफ़र उन्होंने 2015 में शुरू किया, परंतु नेपाल में आये भूकंप की वजह से नेपाल व चीन सरकार द्वारा पर्वतारोहण पर रोक लगाने की वजह से उन्हें अपनी यात्रा रोकनी पड़ी. जिसके बाद उन्होंने पुनः 2016 में एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की और 8,300 मीटर की ऊंचाई पर पहुँचने के बाद स्नो ब्लाइंडनेस, फ्रोस बाईट तथा टेक्नीकल डिवाइस में खराबी होने के कारण उन्हें अपनी यात्रा रोकनी पड़ी और उन्हें रेस्क्यू कर वहां से निकाला गया.

पूर्व में भी कर चुके हैं प्रयास – अधिकारिक तौर पर छत्तीसगढ़ राज्य के पहले अंतर्राष्ट्रीय एवं पेशेवर पर्वतारोही राहुल गुप्ता ने इससे पहले भी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए प्रयास कर चुके हैं परंतु कुछ कारणों से वे विफल रहें जिसके लिए उन्होंने विगत दो वर्षों से स्वास्थ्य समस्या होने के बावजूद भी पूरी लगन से मेहनत की है और इस बार अपनी यह यात्रा पूरी करने के लिए वे पूरी तरह से आत्मविश्वास से ओत-प्रोत हैं.

दूसरे छोर से करेंगे चढ़ाई – राहुल ने बताया की उन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए नॉर्थ पोल यानि चाइना की तरफ से दो बार प्रयास किया था परंतु इस बार वे साउथ पोल, नेपाल की तरफ से चढ़ाई करेंगे. उनका कहना है कि अपने पिछले प्रयासों से उन्होंने बहुत सी चीजें सीखी हैं जो उन्हें इस बार की यात्रा में काफी मदद करेगी. वे अपनी पूरी उर्जा और उत्साहित मन से एवरेस्ट की चढ़ाई करने हेतु मनोवैज्ञानिक व शारीरिक तौर पर तैयार हैं. इस यात्रा का उनका प्रमुख लक्ष्य प्रदेश व अपने क्षेत्र को गौरव की नई ऊंचाईयों पर ले जाने के साथ-साथ युवाओं के लिए एक प्रेरणा प्रदान करना चाहते हैं कि यदि आप पूरी मेहनत और अपने लक्ष्य को केंद्रित रहें तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी आसानी से हासिल कर सकते हैं.

पुरस्कार और सम्मान – वर्ष 2013 से लेकर अब तक राहुल को इन 5 वर्षो में कई अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है. जिन्हे दिल्ली के एक बड़े संस्थान से दिल्ली गौरव अवार्ड (2015), राज्य स्तरीय व नेशनल गौरव अवार्ड (2016) राष्ट्रीय स्तर मुख्यत: है , जो उनकी पर्वतारोहण के कारण दिया गया है. उनकी पीक-टु-पीक क्लाइम्बिंग (पर्वत से पर्वत) की विशेषता के लिए राहुल को जनता, मीडिया व जन-प्रतिनिधी के द्वारा “माउंटेन मैन” के ख़िताब से भी नवाजा जा चुका है. राहुल का नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में भी दर्ज है. आज के समय राहुल छत्तीसगढ़ राज्य के एकलोते पेशेवर अन्तराष्ट्रीय पर्वतारोही हैं. इनके अन्तराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में अफ्रीका महाद्वीप के सबसे ऊँची छोटी तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो (फ्री स्टैंडिंग माउंटेन) व यूरोप की सबसे ऊंची चोटी रूस स्थित माउंट एल्ब्रुस की चढ़ाई व उनसे जुड़े रोमांचक किस्से सभी लोगो के जेहन में हैं.

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