** संचालक मंडल के द्वारा की गई नियुक्ति पर भी उठे सवाल, कहा धारा 409 के आरोपी को बनाया प्रबंधक, पहले भी कलेक्टर कर चुके हैं सस्पेंड
रामानुजगंज / महावीरगंज – आदिम जाति सेवा सहकारी समिति भँवरमाल में 14.5 लाख रु शासकिय राशि के गबन मामले में मुख्य आरोपी एवं सस्पेंडेड व्यक्ति को मंजर अंसारी को संचालक मंडल द्वारा पुनः प्रबंधक नियुक्त किए जाने पर एक बार फिर मामला गर्म हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस नियुक्ति को अवैध बताकर उसे सेवा से पृथक किए जाने की मांग की है।

स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन के माध्यम से ये अवगत कराया है कि उपार्जन केंद्र महावीरगंज में वर्ष 2017-18 में 14.5 लाख रु शाकीय राशि के गबन के मामले तत्कालीन प्रबंधक एवं कम्प्यूटर आपरेटर पर कलेक्टर के निर्देश पर आईपीसी सेक्शन 409 के तहत मामला दर्ज किया गया था। लेकिन आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं खरीदी के दौरान सहायक प्रबंधक एवं कम्प्यूटर आपरेटर की नियुक्ति को अवैध मानते हुए कलेक्टर ने तत्काल मंजर अंसारी को सेवा से पृथक कर दिया था। फिर भी संचालक मंडल के संरक्षण में वह लगातार उपार्जन केंद्र महावीरगंज में कार्यरत रहा, उपार्जन केंद्र महावीरगंज में 14.5 लाख रु की घोटाला पाए जाने के बाद जैसे ही प्रबंधक एवं कम्प्यूटर आपरेटर पर कलेक्टर के निर्देश से धारा 409 के तहत मामला दर्ज हुआ। प्रबंधक एवं ऑपरेटर दोनों फरारी काटने लगे, प्रबंधक के अनुपस्थिति का फायदा उठाकर संचालक मंडल ने पुनः उसी आरोपी को प्रबंधक बनाकर वित्तीय कार्यभार सौंप दिया जिसके खिलाफ अपराध दर्ज था। संचालक मंडल ने अपने प्रस्ताव में लिखा कि वैकल्पिक व्यवस्था के अनुसार मंजर अंसारी को वितीय प्रभार दिया जाता है। इसी बीच मे संचालक मंडल भी भंग हो गई और भँवरमाल समिति में एच एन पुरैना को भेजा गया, जब पुरैना साहब अपना पदभार ग्रहण कर ही लिए तो ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नियुक्त आरोपी प्रबंधक की आखिर जरूरत ही क्या है। एक तरफ पुलिस जांच में वह हमेशा ये कहकर बचता रहा की कलेक्टर ने हमें बीच में ही निकाल दिया है। इसलिए घोटालों से हमारा कोई संबंध नहीं है और दूसरे तरफ जैसे ही संचालक मंडल ने उसे वित्तीय प्रभार दिया उसने सर्वप्रथम अपना मानदेय भुगतान कराने का प्रस्ताव पारित किया, जिसमें लिखा गया कि आपरेटर एवं सहायक प्रबंधक मंजर अंसारी को माह सितंबर 2017 से मार्च 2018 तक का मानदेय भुगतान किया जावे..जबकि कलेक्टर ने 16 जनवरी को ही उसे दोनो पद से हटा दिया था। एक तरफ खुद को जनवरी 2018 में ही सस्पेंड होना बताकर पुलिस जांच से खुद को अलग करना एवं दूसरे तरफ मार्च 2018 तक का भुगतान पाना वास्तव में कई सवालों को जन्म देती है। ऐसे में संचालक मंडल की भूमिका और मंशा पर सवाल विभिन्न प्रकार के उठाते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन के साथ समिति का प्रस्ताव एवं कलेक्टर द्वारा की गई कार्यवाही का दस्तावेज संलग्न कर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है एवं मंजर अंसारी की नियुकि को अवैध बताते हुए तत्काल उसे सेवा से पृथक किए जाने की भी मांग की है

इंडियन कानून धारा 409 आईपीसी – इंडियन पीनल कोड – लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन
विवरण
जो भी कोई लोक सेवक के नाते अथवा बैंक कर्मचारी, व्यापारी, फैक्टर, दलाल, अटर्नी या अभिकर्ता के रूप में किसी प्रकार की संपत्ति से जुड़ा हो या संपत्ति पर कोई भी प्रभुत्व होते हुए उस संपत्ति के विषय में विश्वास का आपराधिक हनन करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा।
लागू अपराध
लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन
सजा – दस वर्ष कारावास और आर्थिक दंड।
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।
