** जनता देश में तानाशाही शासन लागू करने का विरोध करे : अजीत जोगी
** केंद्र और दिल्ली सरकार का टकराव लोकतान्त्रिक और संघीय व्यवस्था के लिए घातक
** उपराज्यपाल से कराया जा रहा दायित्वों का राजनीतिकरण
** दिल्ली, छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों में प्रशासनिक अधिकारी केंद्र सरकार के राजनितिक एजेंट की भूमिका निभा रहे हैं।
रायपुर / छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के सुप्रीमो अजीत जोगी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा दिल्ली में प्रशासनिक हड़ताल ख़त्म करने के लिए राज निवास में दिए जा रहे धरने के समर्थन में केजरीवाल को पत्र भेजा है।
श्री अजीत जोगी ने श्री अरविन्द केजरीवाल को पत्र में लिखा है कि राजनीतिक द्वेष एवं अहंकार से ग्रसित केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित प्रशासनिक हड़ताल के विरुद्ध किये जा रहे आपके धरने का वे समर्थन करते हैं। मैं, मेरे दल जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के लाखों कार्यकर्ता एवं ढाई करोड़ छत्तीसगढ़वासी, संघर्ष की इस घड़ी में केजरीवाल जी के साथ हैं।
जोगी ने कहा है कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच जारी यह टकराव देश की लोकतांत्रिक और संघीय व्यवस्था के लिए घातक है। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्लीवासियों द्वारा चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार को केवल राजनीतिक उद्देश्य एवं स्वार्थ की पूर्ति के लिए चलने नही दिया जा रहा है एवं अकारण परेशान किया जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं उनके वरिष्ठ मंत्रियों से पिछले छह दिनों से नही मिलना, महामहिम उपराज्यपाल के दायित्व के राजनीतिकरण को दर्शाता है। दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच इस विवाद से उपराज्यपाल जैसे संवैधानिक और निष्पक्ष पद की गरिमा को ठेस पहुंची है।
प्रशासनिक अधिकारीयों की भूमिका पर श्री अजीत जोगी ने पत्र में कहा है कि दिल्ली सहित छत्तीसगढ़ एवं कई अन्य राज्यों में प्रशासनिक अधिकारी केंद्र सरकार के राजनीतिक एजेंट की भूमिका निभा रहे हैं एवं लोकनीति का पथ छोड़, राजनीति के पथ पर चल रहे हैं। संघीय व्यवस्था में इस गलत प्रथा से आम जनता को भारी नुकसान हो रहा है। दिल्लीवासियों की पीड़ा आज समूचे देश के समक्ष है। केंद्र सरकार विकास समर्थक होने की जगह विकास अवरोधक की भूमिका निभा रही है।
पत्र के अंत में अजीत जोगी ने देशवासियों से अपील करते हुए लिखा है कि गैर भाजपा और गैर कांग्रेस राज्यों एवं दलों के प्रति केंद्र की एनडीए सरकार की भेदभावपूर्ण नीति एवं तानाशाही रवैये का वे प्रचंड खंडन करते हैं एवं देशवासियों से यह अपील करते हैं कि वो देश में तानाशाह शासन लागू करने के प्रयासों का मिलकर विरोध करें एवं देश की लोकतांत्रिक एवं संघीय व्यवस्था को मजबूत करें।
