** मेरी पतंग की डोर अब जनता के हाथ में है – रेवा यादव
** Bjp ने अलग-अलग टुकड़ियों में बट कर किया प्रचार
** कांग्रेस की ढीली पड़ी पकड़
** राम सेना अब राम भरोसे
** असल लड़ाई bjp और कांग्रेसी समर्थक प्रत्याशी के बीच
** मतदाताओं में जरा सा भी उत्साह नही
** कम वोटिंग के आसार
कोरिया / कोरिया जिले के जिला पंचायत कुडेली उपचुनाव में आज 24 जून को मतदान होना है। हाई प्रोफाइल बन चुके इस चुनाव में ऐसा लग रहा की मानो विधानसभा या लोकसभा का चुनाव हो रहा है। इसलिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत इस सीट के लिए झोंक दी है। मालूम हो कि इस सीट के लिए कुल 4 प्रत्यासी मैदान में है।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से पतंग छाप में मंत्री प्रतिनिधि रेवा यादव मैदान में है। चुनाव घोषणा के पूर्व ही उन्होंने अपनी तैयारी करना जोर- शोर से आरंभ कर दिया था। फिलहाल वो हर समाज की बैठक के साथ हर गांव, गली, मोहल्ले में दिन – रात लगातार बैठकों में शामिल हुए है। इतना ही नहीं स्वयं मंत्री भईयालाल राजवाड़े भी रेवा यादव के समर्थन में चुनाव प्रचार कर उनके लिए मतदान करने की अपील कर चुके है। इनके साथ भाजपा के कई दिग्गज नेता अलग – अलग टुकडियों में चुनाव प्रचार में जोर आजमाइस कर चुके है।
वहीं कांग्रेस की ओर से मैदान में उतरे रामकृष्ण साहू ने भी अपने दम पर प्रचार – प्रसार जोरदार किया है। हालाँकि शुरुआत में जैसे पूरा कांग्रेस एकजुट नजर आ रहा था पर प्रचार के अंतिम दौर में ऐसा दिखाई नही दिया। शायद कांग्रेस ने समय रहते यह भाप लिया कि जीत वह पीछे ही रहेंगे इसलिए एक्का – दुक्का नेताओं को छोड़ सारे नेता मतदान के पूर्व ही वापस अपने काम पर लग थे।
हिंदू सेना के शिव यादव भी जीत के लिए 24 ग्राम पंचायत के गांव गली में दरवाजे ठोकते नजर आए और अपने प्रचार – प्रसार से उपस्थिति दर्ज कराई। इसके वावजूद जानकर उनके जीत का दूर – दूर तक कोई निशान नही होने की बात कह रहे है।
इन सब के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अजीत बड़ा भी चुनाव मैदान में है और उनका प्रचार-प्रसार बाहरी तो नही मगर अंदरूनी तौर पर खूब दिखाई दिया। जिससे यह कयास लगाए जा रहे है कि चुनावी जीत में गोंगपा माहौल बिगाड़ सकती है। अब यह देखना बड़ा दिलचप्स होगा कि जिले में पिछले विधानसभा चुनाव की ही तरह गोंगपा किस पार्टी से कुर्सी खिंचने में सफल रहेगी। हालांकि इनकी तीसरी पोजीसन इस चुनाव में भी पक्की मानी जा रही है।
जिला पंचायत क्रमांक 8 की इस सीट को हारने का रिस्क कोई भी पार्टी नहीं लेना चाहती चूँकि कुछ माह बाद ही इसी वर्ष विधानसभा चुनाव भी सम्पन्न होने वाले है।
इन सब के बीच यह भी सत्य है कि ग्रामीणों में इस चुनाव को लेकर कोई खास उत्साह नही देखा गया इसलिए आज जो भी दल मतदाताओं को मतदान तक लाने में सफल होता है उसे फायदा जरूर पहुचेगा।
