कोरिया / घड़ी चौक में देवरहा सेवा समिति द्वारा आयोजित शोक सभा मे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई जी के निधन के पश्चात श्रद्धांजलि दी गई।
इस दौरान उनके छायाचित्र पर सभी ने मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 2 मिनट का मौन धारण कर इस महान मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
सभा में श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय अटल जी के कार्यकाल के पोखरण की धमक की गूंज आज पूरे विश्व में गूंज रही है। उनके प्रधानमंत्री रहते हुए पोखरण में परमाणु बम के परीक्षण ने भारत को विश्व की महान शक्तियों में शामिल कर दिया था। श्री राजवाड़े ने कहा कि ये वाकई एक युग का अंत है क्योंकि अब देश में कोई भी ऐसा नेता नहीं रहा, जिनकी स्वीकार्यता दलीय राजनीति से परे होकर भी हो, जो सबके प्रिय हों, विरोधी भी जिनके कायल हों। भाजपा जिलाध्यक्ष तीरथ गुप्ता ने कहा कि आज गांव गांव में जो सड़कों का जाल दिखाई दे रहा है, वह प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी बाजपेई के द्वारा चलाई गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कारण हुआ है जिससे आज शहर व गांव की दूरी में कोई अंतर नहीं रह गया और गांवों का चौमुखी विकास भी हो रहा है।

पूर्व नपा अध्यक्ष शैलेष शिवहरे ने कहा कि स्व.अटल जी आखिरी ऐसे नेता थे, जिनकी सौम्यता, शख्सियत, जिनका बहुआयामी व्यक्तित्व एक मिसाल है। अटल जी जैसे नेता सदियों में एक होते हैं, अटल जैसे थे, वैसे ही दिखते भी थे, वैसा ही कहते भी थे, बनावटीपन नहीं था उनमें। क्या कोई और नेता सार्वजनिक रूप से ये कहने का साहस कर सकता है कि वो अविवाहित हैं, कुंवारे नहीं!

जिला पंचायत सदस्य व भाजपा जिला महामंत्री देवेंद्र तिवारी ने कहा कि स्व. अटल जी ने हमेशा राजनीति में नई लकीर खिंची, बलरामपुर से जनसंघ टिकट पर लोकसभा सांसद बनकर स्व.अटल जी जब संसद पहुंचे और 1957 में पहली बार नेहरू की विदेश नीति के खिलाफ बोलने के लिए उठे तो किसी को अंदाजा न था कि संसद एक ऐसे प्रखर वक्ता को सुनने जा रही है जो भूतो न भविष्यति है। तब ज्यादातर सांसद अंग्रेजी में बोला करते थे, अटल जी ने हिंदी में बोलना शुरू किया तो कई सांसद बाहर निकल गए, लेकिन जो रह गए, उन्होंने इतिहास बनते देखा। हिंदी में इतना धाराप्रवाह और लच्छेदार भाषण अटल से पहले किसी ने कभी दिया ही न था और सिर्फ भाषा ही नहीं, तथ्यों और तंजों के अटल वार ने नेहरू का दिल जीत लिया। नेहरू जब लोकसभा में जवाब देने उठे थे तो सबसे पहले अटल जी के भाषण की तारीफ की थी। संसद की हर कार्यवाही मिनट दर मिनट रिकॉर्ड में दर्ज होती है और संसदीय राजनीति का इतिहास जानने को इच्छुक लोगों के लिए ये अनमोल दस्तावेजी अनुभव है, जो ऐसे तमाम पलों का गवाह है, जिसने संसद को कभी लोकतंत्र के मंदिर का दर्जा दिलाया था।
वरिष्ठ नागरिक आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि स्व. अटल जी इसलिए सर्वकालिक महान नेता थे,क्योंकि उन्होंने कभी व्यक्ति विरोध की राजनीति नहीं की, हमेशा मुद्दों पर समर्थन-विरोध किया। ये अपने आप में एक विचित्र किंतु रोचक तथ्य है कि कांग्रेस शासन में स्व.अटल जी को संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करने भेजा गया, जहां उन्होंने हिंदी में भाषण देकर हिन्दुस्तान की राष्ट्रभाषा का गौरव बढ़ाया।

वरिष्ठ नागरिक श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी उनकी कविता के माध्यम से याद करते हुए उन्हें भारत देश का सच्चा सपूत बतलाया। ब्राम्हण समाज के जिलाध्यक्ष जय बाजपेई ने कहा कि आज हमें स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि स्वर्गीय अटल जी ने इंदिरा की 1971 जंग के लिए तारीफ की तो इमरजेंसी के लिए प्रखर आलोचना भी की, इमरजेंसी के दौरान नसबंदी के लिए तारीफ की तो नसबंदी के लिए अपनाए गए तौर-तरीके की आलोचना की। ये अटल जी की राजनीति थी। उन्होंने कभी हिंदुत्व के एजेंडे को हाशिये पर नहीं डाला, हिंदू तन-मन पहचान मेरा कविता में डंके की चोट पर खुद को हिंदू बताया, संघ पर हमले के खिलाफ संसद में कई बार खुलकर बोले, उन्होंने मंदिर निर्माण आंदोलन में भी आडवाणी का रास्ता नहीं रोका, लेकिन बाबरी विध्वंस पर अपनी नाराजगी भी नहीं छिपाई। उन्हें लखनऊ के मुस्लिम वोट भी उसी भारी तादाद में मिलते थे, जितने हिंदू वोट। आडवाणी उनके बेहद करीबी थे और आडवाणी ही मोदी के कवच भी थे, इसके बावजूद अटल जी की मोदी को राजधर्म निभाने की नसीहत देश भर में आज भी चर्चित है।
भाजपा जिला महामंत्री कृष्ण बिहारी जायसवाल ने कहा कि पोखरण, कारगिल जैसे कड़े कदमों ने अटल जी को कठोर-साहसिक छवि दी तो उनकी गरिमामयी संसदीय राजनीति और कवि रूप ने व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाया।

कार्यक्रम में गौ रक्षा वाहिनी के जिलाध्यक्ष अनुराग दुबे, जिला खेल अधिकारी राजेंद्र सिंह, यूएस शुक्ला, नगरपालिका उपाध्यक्ष सुभाष साहू, रामधनी गुप्ता, भानु पाल, पंकज गुप्ता, विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री अमित श्रीवास्तव, राहुल मिश्रा, सुनील शर्मा, कुबेर साहू, गुलाब चंद्र बड़ेरिया, इंदर चंद जैन, अरशद खान, आशीष गुप्ता, सुशील गुप्ता, कामतानाथ तिवारी, महेंद्र वैद्य, शिवपूजन गुप्ता, अरविंद सिंह, रमन गुप्ता, कमलेश गुप्ता, सुदीप सोनी, सुवेज अहमद, शैलेंद्र शर्मा, प्रभाकर सिंह, अनूप अग्रवाल, पंचम शिवहरे, सलमान अहमद, लक्ष्मी गुप्ता, घनश्याम साहू, विशाल सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
