कोरिया / हमेशा जनसेवा इस लक्ष्य को फिर एक बार श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने चरितार्थ किया है, इस बार जब केरल में बाढ़ की त्रासदी में फंसे लोगों ने मोबाइल के माध्यम से मदद की गुहार लगाई तब रात में ही इसके लिए पहल शुरू कर दिया और लगातार केरल में अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं।
केरल निवासी आरके पिल्लई जो कि पूर्व में चरचा कालरी में कार्यरत थे, उन्होंने शनिवार रात लगभग 10 बजे श्रम मंत्री के मोबाइल पर संपर्क किया और बताया कि वे लोग ग्राम चेंगानुर श्रीवन्दूर मंदिर के पास ऊंची पहाड़ के चोटी पर फंसे हुए हैं यह स्थान केरल राज्य के जिला अलेपी के अंतर्गत आता है और वर्तमान में पूरी तरह से भीषण बाढ़ की चपेट में है। श्री पिल्लई ने वहां की दशा बताते हुए कहा कि वे लोग भारी मुसीबत में हैं और मदद की दरकार है।
मुसीबत के बीच उन्होंने श्रम मंत्री से मदद की गुहार लगाई खबर मिलते ही श्रम मंत्री श्री भैयालाल राजवाड़े ने मानवता का परिचय देते हुए रात्रि में ही केरल राज्य के अपर मुख्य सचिव स्टेट रिलीफ कमिश्नर पीएच कुरियन से चर्चा किया और बाढ़ में फंसे लोगों के लिए तत्काल ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित निकालने की बात कही। श्रम मंत्री ने एयर लिफ्टिंग से उन्हें सुरक्षित निकालने को कहा। जिसके बाद अपर मुख्य सचिव से आज हुई चर्चा अनुसार अपनी ओर से ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। बाढ़ पीड़ित और ऑपरेशन टीम के बीच सम्पर्क भी हो चुका था और निकालने की कार्यवाही भी जारी थी।
शनिवार रात्रि काफी देर तक श्रम मंत्री केरल के अधिकारियों के संपर्क में रहे और रविवार सुबह से ही एक बार फिर उनके बारे में संपर्क करते रहे। दोपहर तक पीड़ितों को निकालने की सूचना तो प्राप्त नही हुई थी और मोबाइल लगातर बंद मिलने के कारण पीड़ितों से संपर्क भी नही हो पा रहा था लेकिन श्रम मंत्री लगातार केरल राज्य के अधिकारियों के संपर्क में है।
वहीं इस बारे में श्रम मंत्री श्री राजवाड़े ने कहा है कि सिर्फ जनसेवा ही एकमात्र लक्ष्य है, चरचा में रहकर कभी काम करने वाले व्यक्ति ने मुसीबत पड़ने पर केरल से मुझसे संपर्क किया और मदद की गुहार लगाई, तो मैंने भी उनके मदद के लिए वहां संपर्क किया है और लगातार खबर लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आप कल्पना कीजिये कि रात में मुसीबत के समय श्री पिल्लई जी ने कितने उम्मीद के साथ मुझसे संपर्क किया क्योंकि वर्तमान में वे विषम परिस्थिति के बीच जूझ रहे हैं। मेरा यह धर्म है कि मैं उनकी मदद करूँ और मैं अपना धर्म निभा रहा हूँ।
