कोरिया / 18 सितम्बर को अटल विकास यात्रा के तहत सूबे के मुखिया डॉ.रमन सिंह चरचा पहुँचे, उनका उड़नखटोला सबसे पहले रनई ज़मीदार और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव योगेश शुक्ला के गांव में उतरा। जिसके बाद रथ पर सवार होकर मुख्यमंत्री लगभग 30 किमी का रोड शो करते हुए चरचा पहुँचे यहां उन्होंने विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया साथ ही आमसभा को संबोधित किया। इस बार मुख्यमंत्री के आगमन पर पटना से लेकर चरचा तक अनेक नजारे देखे गए जो कि अभी तक लोगों की जुबान पर हैं।
सबसे पहले रनई में बने मंच पर कांग्रेस नेता योगेश शुक्ला ने बतौर ज़मीदार मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा किया। तो वहीं रथ यात्रा के आगे बढ़ने के बाद पूरे मार्ग में भीड़ न के बराबर ही रही। बताया तो यह भी जा रहा है कि बैकुंठपुर में देवरहा सेवा समिति के द्वारा पहले बस स्टैंड और फिर बाद में स्कूलपारा में स्वागत के बाद जब मुख्यमंत्री का काफिला चरचा के लिए आगे बढ़ा तो भीड़ एकदम शून्य थी। जिससे मुख्यमंत्री काफी नाराज हुए और रथ में ऊपर निकलने से मना कर दिया। जिसके कारण उनके स्वागत में तलवापारा, खरवत और श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े के गृह क्षेत्र सरडी चौक में खड़े हजारों महिला पुरूष भी नाराज हो गए और सरडी में तो महिलाएं स्वागत के लिए सर पर कलश रखकर तैयार थी लेकिन मुख्यमंत्री का रथ रुकना तो दूर स्पीड से ही निकल गया। जिससे उन्हें निराशा हाथ लगी।
सूत्र बतलाते हैं कि रोड शो में कम भीड़ और चरचा की आमसभा में अधिकतर कुर्सियां खाली थीं जिस पर मुख्यमंत्री ने काफी नाराजगी व्यक्त की और यहाँ तक कह दिया कि जब भीड़ नही कर सकते थे तो ऐसी सभा क्यो कराई? बताया जाता है कि रनई से लेकर चरचा तक रोड शो विकास यात्रा का 111वां क्रम था जो कि सबसे फ्लॉप रहा, यह मुख्यमंत्री को भी नागवार गुजरा है।
बहरहाल पहले दिन के घटनाक्रम के बाद दूसरे दिन एक और वाकया हुआ जब चरचा कॉलरी के एसईसीएल रेस्ट हॉउस में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह प्रेस को संबोधित कर रहे थे, अमूमन अब तक होता यह है प्रेस कांफ्रेंस में कौन साथ होगा यह सब पहले से सेट होता है जिसमें मुख्यमंत्री के साथ उस क्षेत्र के प्रभारी मंत्री और स्थानीय विधायक ही मौजूद रहते हैं लेकिन इस बार प्रेस कांफ्रेंस में भरतपुर-सोनहत क्षेत्र के पूर्व विधायक फूलचंद सिंह की मौजूदगी चर्चा का विषय रही।
जानकर बतलाते हैं कि इस बार कोरिया में लगातार तीसरी बार तीनो सीट जितना बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण है और यदि चेहरा नही बदला गया तो सीट जितना कठिन भी है।सर्वे में भी यह बात सामने आ चुकी है। ऐसे में पार्टी अगर भरतपुर-सोनहत से यदि फिर फूलचंद्र सिंह को मैदान में उतार दे तो कोई अतिश्योक्ति नही होनी चाहिए। पिछले कई महीनों से क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी बढ़ी है वे पढ़े लिखे पूर्व खाद्य अधिकारी और मुख्यमंत्री के काफी करीबी भी हैं, पिछले चुनाव के दौरान स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण उनका टिकट काटा गया था। वे भरतपुर क्षेत्र में भाजपा के पास एक बड़ा चेहरा हैं और जातिगत समीकरण में भी फ़ीट बैठते हैं। वर्तमान समीकरण उनके पक्ष में है और प्रेस कांफ्रेंस में उनकी मौजूदगी इन तमाम अटकलों को बल भी देती है।
