00 चाईना दियो पर लाईट पर प्रशासन की सख्ती कुम्हारों को उम्मीद खूब बिकेगी मिट्टी के दिये
00 दिपावली के पहले निकला कुम्हारों को दर्द
कोण्डागांव से विजय शर्मा की रिपोर्ट / कोण्डागांव से 3 कि.मी. दूर बसे ग्राम कुम्हार पारा का नाम कुम्हार पारा इसलिये पड़ा चुकी 60 वर्ष पूर्व यहां बहीगांव कोपरा से आकर कुछ परिवार बसे थे आज यहां कुम्हारों के 375 परिवार निवासरत हैं। जिनकी आय का जरीया मिट्टी के दिए हैं। कुम्हारी मिट्टी के बर्तन लगातार हर दिपावली में घटते क्रम में है यही वजय है की लोगो को मिट्टी के दियों के प्रति जागरूक कर रहे है।
क्या कहा 95वर्षीय मुन्ना राम चक्रधारी ने:- पहले दिपावली में हर घर के लोग 100 से 200 दियों से रौशन करते करते थे घर अब मात्र 5 या 11 मटटी के दिये सगुन के तौर पर खरीदते हैं। बाकी बिजली की झालर लगा लेते हैं। ये हमारी 6वीं पिढ़ी हैं। जो दिये बना रही हैं। हम चाहते हैं लोग मट्टी के दिये जलाये बिजली की बचत तो होगी ही इसके साथ ही सैकड़ो कुम्हार परिवार के घर भी इस दिवाली रौशन कर सकते है।
कैसे करते हैं तैयार दिये:- पहलेे चिकनी मिट्टी कुटते हैं, सुखाते हैं। पत्थर ककड़ छान कर अलग करते हैं। फिर एक बार मिट्टी छान कर महीन करते हैं। फिर आटे के समान गुथ कर उसे आकार देते हैं। जिसके बाद खुले आसमान में सुखाते हैं। अगर बारीश आ गयी तो सब पर पानी फिर जाता हैं। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो सुखने के बाद लकड़ी और पैरा डाल उसे पकाते हेैं। अंत में फिर उसे रंगते हैं। इस पुरे काम में एक सप्ताह लग जाता हैं। इस प्रक्रिया को तैयार करने में पूरा परिवार जुट जाता हैं। तब तैयार होते हैं दिये। जिसकी कीमत मात्र 1 से 2 रू. प्रति दिया।
सरकार से मदद :- 375 से ज्यादा परिवार के सदस्यों में चेतमन, चैतराम, सम्पती ने बताया की कई वर्षो में शासन से हमें किसी योजना का कोई लाभ नही मिला। पहले जलाने पकाने के लिये लकड़ी आसानी से मिल जाती थी। अब वो भी 300 से 400 रू.क्विंटल हो चुकी हैं। चाहते हैं शासन कुम्हारों के लिये कोई लाभकारी योजना शुरू करें।
