विजय शर्मा – कोंडागांव / एक ओर लोग पालूत पशुओं का दुग्ध निकाल आवारा छोड़ देते है। सड़कों पर जहां सड़क पर दुर्घटनाओं में मारे जाते है। हर रोज पशु तो भूख के चलते वो गंदगी, कचरा, पोलिथिन तक खा रही है। ये वो पशु गाय हैं, जो लोग अपने घरों में मात्र उनका दुग्ध दोहन तक सीमित रखा है।
वहीं जिले की इकलौती कामधेनू गौशाला जहां लोगों द्वारा ऐसे पशु ले जाकर छोड़ दिये जाते है। जो उम्र दराज हो चुके है या बिमार होते हैं। इस गौशाला में वो शायद पूरे प्रदेश के लिये अनूठी और एक मिशाल होगी। अपने आप में इस गौशाला को देखने के लिए कई मंत्री और समाज सेवी आ चुके है और इनके कार्यो की हो रही देशभर में तारीफे व कई पुरूस्कार मिल चुके।
जो लोग घर के पशुओं को हरा चारा उपलब्ध नहीं करवा पाते मगर इस गौशाला में 200 से ज्यादा गाय बैल भैसों को ये संस्था प्रतिदिन दाने के साथ हरा चारा उपलब्ध करवाती है जो बकायदा इसके लिये उसी परिसर में होता है। ऐसे सैकड़ों शेड बना रखे है जहाँ एक सप्ताह में अंदर 2 फुट लंबा हरा चारा तैयारकिया जाता है।
सप्ताह में एक बार डाॅं. भी जाते है – इस गौशाला में प्रशासन द्वारा सप्ताह में एक बार पशु चिकित्सक भी भेजे जाते है। जो उनका परीक्षण कर दवाएं देते है।
बिंदेष्वरी संचालिका – कामधेनू गौशाला – इन्होने अपना पूरा समय इन पशुओं के लिए समर्पित कर दिया है और गांव के लोगों को भी जागरूक कर इस कार्य से जोड़ रहे है, ये कहते है की सकून से बढ़ कर कुछ नहीं जो इनकी सेवा से मिलता है। पहले सुखा चारा देते थे, अब 6 माह से हम हरा चारा दे रहे है। जो हम स्वयं तैयार करते है। मात्र सप्ताह से 10 दिन में तैयार होता है चारा।

