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गेज / झुमका मध्यम सिचांई परियोजना मे स्लूस गेट के मरम्मत कार्य मे गड़बड़ झाला, जल संसाधन विभाग बैैैकुण्ठपुर का कारनामा

00 कार्यपालन अभियंता व्ही0एस0साहू का एक और कारनामा

00 सुचना के अधिकार से हुआ बड़ा खुलासा

कोरिया / जल संसाधन संभाग बैैैकुण्ठपुर के कार्यपालन अभियंता विनोद शंकर साहू की चर्चा इन दिनों खूब हो रही हैं।

मामला चाहे उनके द्वारा कार्यालय में पदस्थ लिपिक के साथ मारपीट का हो या फिर शंकरगढ़ डायवर्सन में काम कर रहे मजदूरों के साथ गाली गलौज या की फिर टेंडर से पहले जल्दबाजी में पाइप खरीदी करने का ये  महाशयइन दिनों खूब सुर्खियों में है।

गौरतलब हो कि बैकुण्ठपुर विकासखंड के ग्राम कसरा में लाखों की लागत से गेज बाईं नहर का निर्माण कार्य कार्यपालन अभियंता श्री साहू ने गुपचुप तरीके से बिना किसी प्रशासकीय स्वीकृति के ही काम शुरू करा दिया था। जिसमे लगभग तीन सौ मीटर गड्ढे भी खोदे जा चुके है। इसकी भनक जब मिडिया को लगी तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। बगैर प्रशासकीय स्वीकृति के नहर खुदाई मामले को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया। खबर प्रकाशन के बाद मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया। जिसमे कलेक्टर ने तत्काल जांच कमेटी बनाई और इस पूरे प्रकरण में ई श्री साहू मुख्य थे और उनके ही दिशा निर्देश पर कार्य कराया जा रहा था। मीडिया के सामने कैमरे में  ने श्री साहू ने खुद स्वीकार किया था कि ग्राम कसरा में गेज बाईं नहर का निर्माण उनके द्वारा बिना प्रशासकीय स्वीकृति के कराया जा रहा है। लेकिन अपने कहे पर मुकरने में माहिर ईई साहू ने कलेक्टर कोरिया को दिए प्रतिवेदन में पूरा ठीकरा अपने अधीनस्थ पर फोड़कर खुद  को पाक-साफ बताया।

आपको बता दे कि वर्ष 2018-19 में गेज एव झुमका मध्यम सिचांई परियोजना मे स्लूस गेट के मरम्मत कार्य में लगे बिल -वाऊचर में कई गड़बड़ियाँ सामने आई है। सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार गेट मरम्मत कार्य के लिए कलेक्टर कोरिया द्वारा जिला खनिज न्यास से 20.98 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 21/06/2018 को प्रदान की गई थी। लेकिन उक्त मरम्मत कार्य मे जिन बिल वाऊचर का भुगतान किया गया है वह बिल-वाउचर प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक से पूर्व के है।
जबकि उक्त कार्य के संबंध में कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग कोरिया के द्वारा पत्र क्रमांक 2557/कार्य/झुमका डेम/बैकुण्ठपुर दिनांक 04/06/2018 को अधीक्षण अभियंता श्याम बरनई परियोजना मंडल अम्बिकापुर को तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने हेतु पत्र भेजा था। इस पत्र के तारतम्य में इन्हें कार्य करने की विभागीय अनुमति भी मिल चुकी थी। अनुविभागीय अधिकारी विद्युत/यांत्रिकी लाइट मशीनरी नलकूप एव गेट उपसंभाग अम्बिकापुर भूषण खलखो ने भी विभागीय अनुमति के आधार पर ही गेट मरम्मत कार्य करना बताया।जब गेट मरम्मत कार्य विभागीय अनुमति के आधार पर कराया गया तो भुगतान भी विभागीय मद से ही होना चाहिए था। लेकिन कार्यपालन अभियंता के द्वारा उक्त गेट मरम्मत कार्य का भुगतान विभागीय मद से न कर के नियम विरुद्ध तरीक़े से जिला खनिज समिति द्वारा आवंटित राशि से बिल-वाऊचर का भुगतान कर दिया है।

“क्या है जिला खनिज न्यास मद के नियम और शर्तें :-

स्वीकृत निर्माण कार्यों के संबंध में निर्माण एजेंसी यह सुनिश्चित करेगी की यह निर्माण कार्य अन्य किसी योजना में शामिल नहीं होना चाहिए। अन्य योजना में कार्य स्वीकृत होने की स्थिति में या प्रशासकीय स्वीकृति स्वमेव निरस्त माना जावेगा। इस नियम के अनुसार गेज एव झुमका गेट मरम्मत कार्य का अनुमति जल संसाधन विभाग को विभागीय अनुमति होने की स्थिति में जिला खनिज न्यास से मिली प्रशासकीय स्वीकृति को निरस्त हो जाना था। लेकिन इसके बाद भी DMF की राशि का भुगतान गेट मरम्मत कार्य में किया गया है। जिसकी जांच गंभीरता से होनी चाहिये।

विदित हो कि RTI के दस्तावेजों के आधार पर खबर का प्रकाशन की गया। हालाँकि इस पूरे मामले में कार्यपालन अभियंता व्ही एस साहू से उनका पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया लेकिन खबर के प्रकाशन तक उनसे संपर्क नही हो सका।

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