चिरमिरी। नगर निगम चिरमिरी में गाड़ियों के फर्जी बीमा मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। RTI से फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद अब महापौर राम नरेश राय ने स्वयं इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
महापौर ने आयुक्त, नगर पालिक निगम चिरमिरी को एक औपचारिक पत्र लिखते हुए स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023-24 सहित पूर्व वर्षों में नगर निगम की गाड़ियों के बीमा दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने निर्देशित किया है कि इन प्रमाण पत्रों की तत्काल जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और यदि घोटाले की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

RTI से खुली थी फर्जीवाड़े की परत
RTI कार्यकर्ता राकेश सिंह द्वारा मांगे गए दस्तावेजों में चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं—
- बीमा प्रमाणपत्रों में ना पॉलिसी नंबर दर्ज था,
- ना ही किसी बीमा कंपनी का नाम,
- और स्कैन बारकोड से दूसरे वाहनों की जानकारी निकल रही थी।
इतना ही नहीं, ये भी सामने आया कि नगर निगम द्वारा 4 वर्षों तक ‘मंजिता ई-सेल्युशन CSC सेंटर’ नामक एक ही फर्म को बीमा टेंडर दिया गया, लेकिन बीमा सिर्फ कागजों पर किया गया, जमीनी हकीकत में कुछ नहीं।
अब जनता की निगाहें कार्रवाई पर
बीमा घोटाले की खबर अब चिरमिरी शहर में गली-नुक्कड़ से लेकर पान दुकानों तक चर्चा का विषय बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं:
- क्या ये सिर्फ एक विभागीय चूक है, या जानबूझकर किया गया घोटाला?
- इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की क्या भूमिका रही?
- और सबसे अहम – जनता के पैसों की भरपाई कौन करेगा?
महापौर के पत्र के मुख्य बिंदु:
- पूर्व में किए गए वाहन बीमा दस्तावेजों की तत्काल जांच के निर्देश
- शिकायतों के आधार पर दस्तावेज संलग्न कर आयुक्त को भेजे
- संभावित फर्जीवाड़े की पुष्टि पर सख्त कार्रवाई और रिकवरी की मांग

यह घोटाला अब सिर्फ RTI और पत्रकारिता का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक ईमानदारी की अग्निपरीक्षा बन चुका है। अब देखना होगा कि क्या निगम प्रशासन वाकई दोषियों को बेनकाब करता है या मामले को फाइलों में दबा दिया जाएगा।
