रायपुर / स्वास्थ विभाग को प्राप्त पेयजल की जाँच रिपोर्ट के अनुसार मरवाही में मलेरिया-टाईफ़ाइड महामारी का एकमात्र और मूल कारण दूषित पेयजल है; साथ ही PHE विभाग द्वारा पेयजल की करी गई जाँच की तथाकथित रिपोर्ट पूरी तरह फ़र्ज़ी है ऐसा कहना है जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) अध्यक्ष अमित जोगी जी का।
अमित जोगी ने सरकार से 5 माँग की है….
– सरकार मरवाही के महामारी प्रभावित ग्रामों में ‘मेडिकल इमर्जन्सी’ घोषित करे: अमित जोगी
– सरकार युद्ध स्तर पर नागरिकों को स्वच्छ पेयजल देने की व्यवस्था करने हेतु स्पेशल फ़ण्ड उपलब्ध कराके सर्वसंसाधन युक्त विशेषज्ञों की टीम तत्काल मरवाही भेजें: अमित जोगी
– जब तक स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं स्थापित हो जाती, तब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सरकार करे: अमित जोगी
– पेयजल को मानक बताने वाली झूठी जाँच रिपोर्ट और लू के कारण लोगों के बीमार होने की बात करने वाले अधिकारियों को सरकार बर्खास्त करे तथा संक्रमण की स्वतंत्र (ग़ैर-सरकारी) रूप से जाँच कराए: अमित जोगी
– राज्य शासन के वित्तीय दिवालियापन के परिपेक्ष में वो केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की माँग करे: अमित जोगी
– सरकार पेयजल की जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक करे: अमित जोगी
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) अध्यक्ष ने बड़ा ख़ुलासा करते हुए कहा कि “अभी कुछ देर पहले मेरी बिलासपुर के ज़िला स्वास्थ अधिकारी से बात हुई है। जैसे कि मैंने कल कहा था, मरवाही में मलेरिया-टाईफ़ाइड की महामारी की समस्या का समाधान स्वास्थ विभाग के पास ज़रूर हो सकता है लेकिन समस्या का जो मूल कारण है, वो लोक स्वास्थ यांत्रिकी (PHE) विभाग की घोर लापरवाही और सरकार का व्यापक भ्रष्टाचार है: महामारी से ग्रसित बस्तियों के जो पानी के सैम्पल्ज़ टेस्टिंग के लिए स्वास्थ विभाग द्वारा भेजे गए थे, उनकी आज प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सब में E. कोलाई नामक बैक्टीरीया की मात्रा मानक स्तर से 10 से 20 गुणा अधिक पाई गई है।
ऐसी स्थिति में तत्काल सरकार को इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए और मरवाही के सभी प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल आपातकाल (Medical इमर्जन्सी) घोषित कर युद्ध स्तर पर नागरिकों को स्वच्छ पेयजल देने की व्यवस्था करने हेतु स्पेशल फ़ण्ड उपलब्ध कराके सर्वसंसाधन युक्त विशेषज्ञों की टीम भेजनी की मैं माँग करता हूँ। साथ ही जब तक स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं स्थापित हो जाती है, तब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करी जाए।
इसके अतिरिक्त जिन अधिकारियों ने ‘लू लग जाने’ जैसी ग़लत जानकारी देकर ख़ुद को बचाने का दुशप्रयास करा था, उनके विरुद्ध सख़्त से सख़्त कार्यवाही की माँग करता हूँ और स्वास्थ विभाग को वास्तविकता को उजागर करने की बधाई देता हूँ।
मरवाही में फैले संक्रमण की स्वतंत्र (ग़ैर-सरकारी) रूप से जाँच भी होनी चाहिए। साथ ही, राज्य शासन के वित्तीय दिवालियापन के परिपेक्ष में वो केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की माँग करे। अब जब समस्या का कारण पता चल गया है, तो शासन को उसे स्वीकार करने और उसका समाधान करने में राजनीति से ऊपर उठकर लोकहित में कार्य करने में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होना चाहिए।
