रायपुर / यूरोपियन संसद के 27 सांसदों के कश्मीर यात्रा पर कांग्रेस ने कहा है कि तीन दिनों में एक ‘इंटरनेशनल बिज़नेस ब्रोकर’ द्वारा प्रायोजित मोदी सरकार का अपरिपक्व और विवेकहीन ‘पीआर स्टंट’ (प्रचार का हथकंडा) देश ने देखा।
एक पूर्णतया अनजान थिंकटैंक के द्वारा प्रायोजित करके यूरोपियन संसद के 27 सदस्यों को भारत लाया गया तथा उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी से करवाई गई, उन्हें कश्मीर के जमीनी हालात लेने के लिए सरकार द्वारा कश्मीर भेजा गया तथा उनकी पत्रकार वार्ता भी आयोजित की गई। आखिर में इस डेलिगेशन के 23 सदस्य ही कश्मीर गए और 4 दिल्ली से ही लौट गए।
पिछले 72 साल से भारत की जाँची और परखी नीति है कि कश्मीर हमारा आंतरिक मामला है तथा हम इस बारे किसी तीसरे पक्ष, समूह, संस्था या व्यक्ति की दखलंदाजी कभी स्वीकार नहीं करेंगे। पिछले तीन दिनों में इस नीति को पलटकर मोदी सरकार ने एक अक्षम्य अपराध किया है।
बीजेपी सरकार ने देश की संसद और प्रजातंत्र का भी घोर अपमान किया है।जब हमारे अपने सांसद और देश के विपक्ष के नेता कश्मीर जाते हैं, तो भाजपा सरकार उन्हें एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर जबरन वापस भेज देती है। इसके विपरीत भाजपा की सरकार यूरोपियन सांसदों जो एक व्यक्तिगत यात्रा पर थे, लाल कालीन बिछा कश्मीर में स्वागत कर रही है और वह भी तब, जब उन्हें उनके देशों के द्वारा औपचारिक यात्रा पर नहीं भेजा गया, बल्कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बिज़नेस ब्रोकर द्वारा एक अनौपचारिक यात्रा पर लाया गया है।
यानि देश के सांसदों से ‘शांति’ का खतरा है और विदेशी सांसदों का कश्मीर में ‘स्वागत’ है। यह अब भाजपा सरकार की नीति है।
भाजपा सरकार के इस अपरिपक्व और विवेकहीन निर्णय से स्पष्ट है कि :-
1. मोदी सरकार ने भारत की कूटनीति को एक अंतर्राष्ट्रीय बिज़नेस ब्रोकर के हाथ गिरवी रख दिया है।
क्या प्रधानमंत्री बताएंगे कि ‘मैडी शर्मा’ कौन है?
भाजपा का इस ‘महिला आर्थिक व सामाजिक थिंकटैंक’ व ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर नॉन अलाईंड स्टडीज़’ से क्या जुड़ाव है?
मैडी शर्मा क्यों व किस हैसियत में प्रधानमंत्री की अप्वाईंटमेंट फिक्स कर रही है, वो भी तब जब यूरोपियन यूनियन के सांसद मैडी शर्मा की संस्था द्वारा प्रायोजित एक व्यक्तिगत यात्रा पर हैं और भारत सरकार इस यात्रा की स्पॉन्सर क्यों बनी है?
एक बिज़नेस ब्रोकर द्वारा प्रायोजित कश्मीर की इस यात्रा का पैसा कहां से आ रहा है?
इस पूरे मामले में देश के विदेश मंत्रालय को दरकिनार क्यों कर दिया गया है?
सच्चाई यह है कि पिछले 72 साल में यह देश की सबसे बड़ी कूटनीतिक चूक है।
2. मोदी सरकार ने जानबूझकर कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण कर दिया है, जो हमारी जाँची और परखी नीति की घोर उल्लंघना है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है।
3. मोदी सरकार ने एक तीसरे पक्ष को कश्मीर बुलाकर जमीनी हालात का जायजा लेने की इजाजत दे कर देश की घोषित नीति का उल्लंघन कर घोर पाप किया है। ऐसा कर मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर पर हमारी संप्रभुता को भी प्रभावित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की संप्रभुता को चुनौती देने, राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रहार करने व देश की संसद का अपमान करने वाले अपने इन निर्णयों के बारे सामने आकर देश को स्पष्टीकरण देना चाहिये ।
