कोरिया / कोरिया जिले के वनांचल जनपद सोनहत की ग्राम पंचायत पोड़ी को गत दिवस महात्मा गांधी नरेगा के तहत जलसंरक्षण संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरूस्कृत किया गया।
इस अवसर पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा में आज आयोजित पुरस्कार समारोह में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने जिले के सोनहत विकासखण्ड के कार्यक्रम अधिकारी श्री जितेन्द्र सिंह और ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती प्रेमाबाई को प्रतीक चिंन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। जिले के ग्राम पंचायत को यह पुरूस्कार मिलने पर कलेक्टर कोरिया श्री डोमन सिंह ने जिला पंचायत सीइओ और मत्स्य विभाग के अधिकारियों के साथ पूरी मनरेगा टीम को बधाई दी हैं। इस पुरूस्कार के संबंध में जिला पंचायत की सीइओ तूलिका प्रजापति ने बताया कि विभिन्न योजनाओं में उत्कृष्ट कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर 22 पुरस्कार मिले हैं। प्रदेश को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की विभिन्न श्रेणियों में नौ, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में सात, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में पांच और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए एक पुरस्कार से नवाजा गया है।

छत्तीसगढ़ को मनरेगा के बेहतरीन क्रियान्वयन के लिए सात श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया। प्रदेश जियो-मनरेगा इनीशिएटिव्ह के क्रियान्वयन में देशभर में दूसरा, कार्यपूर्णता में दूसरा और सुशासन के क्रियान्वयन में भी दूसरे स्थान पर रहा। वाटर हार्वेस्टिंग हेतु संरचना निर्माण के लिए कोरिया जिले के पोड़ी ग्राम पंचायत (विकासखंड सोनहत) को देशभर में दूसरा पुरस्कार मिला है। इस कार्य के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए जिला पंचायत सीइओ तूलिका प्रजापति ने बताया कि अनूसूचित जनजाति की महिलाओं को जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन व उपयोग में अपनी भूमिका बढ़ाने का मौका मिले। इसके लिए पोड़ी में महात्मा गांधी नरेगा से बनी सामुदायिक डबरियों में मछलीपालन का कार्य करते पुरुष समूह के साथ मछलीपालन में आगे बढ़ने के लिए महिला समूह का साथ लिया गया है। इसके अंतर्गत डबरी में जल की आपूर्ति, रख-रखाव तथा प्रबंधन से लेकर मछली बीज संवर्धन, मछलीपालन व विक्रय तक के कार्य में महिला समूह, पुरुष समूह के साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रहा है। इस साथ ने जल प्रबंधन के साथ-साथ समूहों की आर्थिक समृद्धि प्रदान की है।
इस सफल कार्य के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होने बताया कि ग्राम पंचायत पोड़ी के आश्रित ग्राम अमहर में घुनघुट्टा जलाशय है। इस जलाशय में गांव के कुछ परिवार अपने भोजन और आजीविका के लिए मछली पकड़ते रहे। इन परिवारों के युवाओं की मछलीपालन के प्रति रुचि को देखते हुये कोरिया जिले के मत्स्य विभाग ने इन्हें समूह बनाकर मछलीपालन करने का रास्ता सुझाया। इस सुझाव ने आदिवासी युवाओं पर ऐसा असर डाला कि दस युवाओं ने मिलकर शिवम स्व सहायता समूह नाम से अपना एक समूह बना लिया। मछुआरा समूह के रुप में पंजीकृत होकर, इन्होंने मत्स्य विभाग से प्रशिक्षण लिया और आवश्यक संसाधन भी प्राप्त किये। इसके बाद इन्हें मछली उत्पादन के लिए जिला पंचायत से घुनघुट्टा जलाशय सात सालों की लीज पर प्राप्त हो गया। जलाशय इतना बड़ा था कि समूह अपनी सदस्य संख्या के आधार पर तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रहा था। इसी बीच मत्स्य विभाग के अधिकारी श्री यू.के.द्विवेदी की सलाह पर गांव के ही मॉ लक्ष्मी स्व सहायता समूह के बीस सदस्यों का साथ शिवम स्व सहायता समूह का मिल गया। इस साथ ने मछलीपालन के जरिये आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर दिया। दोनों समूहों ने मिलकर, एक नई ओम शिव मछुआ सहकारी समिति का गठन किया, ताकि वे मत्स्य विभाग की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ ले सकें।
मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में महात्मा गांधी नरेगा से घुनघुट्टा जलाशय के ऊपरी भाग में समिति के लिए साल 17-18 में 6 लाख 59 हजार रुपयों की लागत से चार मत्स्य बीज संवर्धन पोखर यानि की सामुदायिक डबरियों का निर्माण कराया गया। इन डबरियों में मत्स्य बीज संवर्धन के कार्य के लिए यह जरुरी था कि इनमें बारहों माह पानी बना रहे। इस जलाशय से थोड़ी दूरी पर ही पहाड़ी पर एक प्राकृतिक झिरिया है, जहाँ से बारहों माह पानी निकलता रहता है। समिति के सदस्यों ने ग्राम पंचायत के सहयोग से महात्मा गांधी नरेगा और रुर्बन मिशन के तालमेल से मिली लगभग नौ लाख रुपयों की राशि से नाली बनाई और झरिया से डबरियों को जोड़ दिया। अब झिरिया का पानी 600 मीटर लंबी इस पक्की नाली से बहकर डबरियों में आता रहता है। डबरियों के भरने के बाद पानी को जलाशय की दिशा में परिवर्तित कर दिया जाता समिति के सदस्यों ने महात्मा गांधी नरेगा से बनी इन सामुदायिक डबरियों (पोखर) में मत्स्य बीज संवर्धन का कार्य प्रारंभ कर दिया। समिति के अध्यक्ष श्री कंवल साय बताते हैं कि अब समिति को फायदा होने लगा है। वे डबरियों में जीरा साईज की मछली बीज लाकर डालते हैं और लगभग 2 महीनों तक उनका पालन करते हैं। इसके बाद जब वे फिंगर साईज की हो जाती हैं, तो उन्हें सोनहत विकासखण्ड के मत्स्य कृषकों को बेच देते हैं। इसके अलावा फिंगरलिंग को जलाशय में भी डालते हैं। इससे मछली उत्पादन भी बढ़ गया है।
इसी गाँव में महिलाओं का राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित माँ भगवती महिला स्व सहायता समूह लेखा और विक्रय के कार्य में दक्ष है। सो, ग्राम पंचायत की सलाह पर महिला समूह का साथ ओम शिव मछुआ सहकारी समिति को मिल गया। अब समूह की महिला सदस्य डबरी में जल की आपूर्ति, रख-रखाव तथा प्रबंधन से लेकर मछली बीज संवर्धन एवं मछलीपालन तक के कार्य में समिति के सदस्यों की मदद करने लगीं। डबरी में मत्स्य बीज संवर्धन के बाद, फिंगरलिंग और मछलियों के विक्रय कार्य का जिम्मा महिला समूह की सदस्यों ने अपने कंधे पर उठा लिया। वे ही बाजार में उनका विक्रय करती और हिसाब-किताब रखती। समूह की सदस्य सुश्री कमला का कहना है कि मत्स्यपालन से जुड़ने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी हो गई है। मेरे घर का गुजारा भी अब इसी से चलता है। समूह की एक और सदस्य श्रीमती पार्वती मुस्कुराते हुये कहती हैं कि मछलीपालन से समूह और समिति के सदस्यों के परिवार को पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन भी मिला है। मेरे बच्चों को मछली की तरकारी बहुत पसंद है, सो हमारे यहाँ अक्सर यह बनती है।
महिलाओं का सहयोग मिलने के बाद, अब समिति के सदस्यों को उनकी मेहनत का सही दाम मिलने लगा है।। गत वर्षं समिति को सभी खर्चें काटकर लगभग 12 लाख हजार रुपयों की आय हुई। इस प्रकार की आपसी भागीदारी ने जल प्रबंधन से मछली बीज संवर्धन और मछलीपालन के इस प्रयास को दिशा देते हुए कोरिया जिले के पोड़ी गांव के आदिवासी परिवारों के लिए आर्थिक समृद्धि की आधारशिला रख दी है। जिले राष्ट्रीय स्तर पर पुरूस्कार और पहचान मिल रही है।
