जानकारी के मुताबिक पूरा मामला उस वक्त का है, जब केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह डाॅ. रमन सरकार में मंत्री थी। इस प्रकरण में यह भी जानकारी सामने आई है कि संस्थान के नाम पर हर साल 100 करोड़ का वारा-न्यारा किया गया, जबकि संस्था केवल कागजों तक सीमित है, इसका कोई अस्तित्व ही नहीं है।
आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के कार्यकाल का एक और बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। इस घोटाले को लेकर हाईकोर्ट बिलासपुर के डिवीजन बैंच के प्रबुद्ध न्याधीश प्रशांत मिश्रा और पार्थ प्रतीम साहू ने फैसले को सुरक्षित रखते हुए सीबीआई को निर्देशित किया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर हाईकोर्ट को रिपोर्ट करे। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि एफआईआर दर्ज करने के 15 दिनों के भीतर संबंधित संस्थान और विभाग के तमाम दस्तावेजों की सत्य प्रतिलिपि को सील करे।
बता दें कि इस बडे़े घोटाले में छत्तीसगढ़ की पूर्व मंत्री रेणुका सिंह का नाम सामने आया है। इसके साथ ही शीर्ष स्तर के तात्कालीन अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, इस मामले में रायपुर के कुुशालपुर में रहने वाले कुंदन सिंह ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
