राजनांदगांव / निजी विद्यालय संघ के सचिव नीरज बाजपेयी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दिया है कि शिक्षा का अधिकार कानून में यह स्पष्ट उल्लेखित है कि किसी प्रकार की सहायता या अनुदान प्राप्त ना करने वाला कोई गैर सहायता प्राप्त प्राईवेट विद्यालय स्कूल पालक समिति या एस.एम.सी. गठन करने के लिए बाध्य नहीं है फिर भी पालकों में पारदर्शिता रखने हेतु संस्थाएँ पालक समिति एस.एम.सी. का गठन करती है। प्राईवेट स्कूलों में संस्था, स्कूल के संचालन के लिए पूर्ण रूप से अधिकृत है। यानि गैर अनुदान प्राप्त प्राईवेट स्कूल पालक समिति या एस.एम.सी. का गठन करने के लिए बाध्य नहीं है।
गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों में उपरोक्त पालक समिति से प्रतिवर्ष स्कूलों में फीस का निर्घारण कर उसकी सूचना नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में प्रस्तुत किया जाता है। चूंकि इस वर्ष मार्च माह ही संपूर्ण लाॅकडाउन की स्थिति निर्मित हो गई थी इसलिए स्कूलों की कुछ जानकारी प्रस्तुत नहीं की जा सकी है। इस आशय की जानकारी मान. उच्च न्यायालय में भी दी जा चुकी है। मान. उच्च न्यायालय बिलासपुर ने अपने निर्णय दिनांक 9 जुलाई 2020 जो इंटरनेट में 27 जुलाई 2020 को अपलोड किया गया था, के अनुसार प्राईवेट स्कूलों को इस शिक्षा सत्र में सिर्फ ट्युशन फीस और बीते शिक्षा सत्र 2019-20 की आउट स्टैंडिंग फीस लेने की अनुमति दी गयी है और इस शिक्षा सत्र में जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती फीस में वृद्धि नहीं करने का निर्देश दिया गया है चूंकि यह निर्णय 27 जुलाई 2020 को अपलोड किया गया है इसलिए इस पर स्कूल अपने स्तर पर मान. उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार निर्णय ले रही है। यदि पालकों को फीस जमा करने में असुविधा उत्पन्न हो रही है तो इसके लिए सीधे स्कूल से संपर्क करने के लिए निर्देशित किया गया है और यह भी लिखा है कि स्कूल इस संबंध में उस पालक की आर्थिक परीक्षण कर इस पर अपना निर्णय ले सकेगी। जो पालक स्कूल में संपर्क कर फीस देने में असुविधा की जानकारी दे रहे हैं उनके लिए मान. हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार कार्यवाही किया जा रहा है लेकिन जो पालक स्कूल से संपर्क नहीं कर स्कूलों के खिलाफ सोशल मिडिया या अन्य तथाकथित छात्र पालक संघ या अन्य लोगों से संपर्क कर स्कूल के नाम से मिलता जुलता वाट्स-अप ग्रुप बनाकर और उसमें अन्य लोग जो स्कूल के पालक नहीं है, को ग्रुप मे जोडकर जो कि तथाकथित छात्र पालक संघ के पदाधिकारी अथवा सदस्य है स्कूलों को फीस नहीं देने की मांग कर रहे हैं इस प्रकार उनके द्वारा स्वयं मान. उच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन किया जा रहा है। प्राईवेट स्कूल एक पंजीकृत संस्था है जिसके पास भी सभी संवैधानिक और वैधानिक अधिकार सुरक्षित है। यदि हम बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं तो फीस लेना हमारा अधिकार है। ऐसा मान. उच्च न्यायालय के अपने निर्णय की कंडिका 25 में भी उल्लेख है।
यदि कोई तथाकथित छात्र पालक संघ के कुछ मुठ्ठी भर लोग बाहर रेड जोन जिले से शहर में आकर शहर में सारे कानून व्यवस्था को तोड़कर शहर के बीच महाजन वाड़ी में लगातार सैकड़ों की भीड़ एकत्र कर पालकों को प्राईवेट स्कूलों को फीस नहीं देने का आह्वान कर रहे हैं तो यह मान. उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 9 जुलाई 2020 और धारा 144 का भी उल्लंघन है। जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारीगण से अनुरोध है कि ऐसे गैर कानूनीकृत करने वालों पर पहले कार्यवाही करें।
