सितंबर 2020 के बाद जब कोरोना संक्रमण नियंत्रण में होता हुआ दिखा तो केंद्र, राज्य सरकार को सारी पाबंदियां समाप्त करने में रुचि रही और व्यापारियों को बाजार खोलकर समान बेचने में। आम जनता को तो जैसे आज़ादी मिल गयी घूमने लगे, बड़े पैमाने पर आयोजन होने लगा, सगाई,शादी,बर्थडे पार्टी होने लगी,लोग परिवार सहित यात्रा में निकल पड़े। इन सबके बीच कोरोना के अगले परिवर्तित रूप के बारे में वैज्ञानिकों ने भी बताना छोड़ दिया।सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एक साल में 135 करोड़ की जनसंख्या में 10लाख वेंटिलेटर का इंतजाम नही कर सके,शहरों के सरकारी अस्पताल को सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में बदल नही सके,राजनीतिक दलों ने चुनावों के लिए अपने अपने सरकारों को झोंक दिया? आज आप किसी भी ए टी एम से 20000 रुपए नही निकाल सकते,ओटीपी आएगा? भारतवर्ष की सारी व्यवस्था लचर हो गयी, कोई नीति नही,कोई प्लानिंग नही, कोई ऑक्सिजन प्लांटों की स्थापना नही,सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम, पाकिस्तान,चीन,बांग्लादेश, राफेल और हमारी सरकार ने ये किया 70 साल में कुछ नही हुआ आदि आदि?भारतवर्ष की सारी अर्थव्यवस्था सिर्फ राजनेताओं को पालने में खर्च हो रही है, आम गरीब जनता,मध्यमवर्गीय लोगो की कोई चिंता नही, कोई स्वास्थ्य की सुविधा नही केवल मेरी मुर्गी की एक टांग? देश का गृहमंत्री सिर्फ कांग्रेस विहीन भारत योजना में लगे हुए है? प्रधानमंत्री सिर्फ सोनार बांग्ला में लगे हुए है केवल भाषणबाज़ी? बाकी राज्यो के मुख्यमंत्री और स्वास्थय मंत्री सिर्फ वैक्सीन और बजट का रोना रो रहे है? आज की वर्तमान स्थिति में भारतवर्ष के 135 करोड़ जनता लाचार है, बेबस है, व्यवस्था की शिकार है काश मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम सही में अवतरित होकर देश के लोगो को बचा सके।
भारतवर्ष की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन – मनीष कुमार झा
