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कोयला परिवहन घोटाले का मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी के तलाश में ईडी, ठिकानों पर 17 बार पहुंची ईडी

रायपुर / फरार सूर्यकांत की तलाश में ईडी उनके करीबी लोगों के ठिकानों तक पहुंच रही है। 11 अक्टूबर से शुरू हुई ईडी की कार्रवाई के बीच टीम ने रायपुर, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़ में संभावित ठिकानों पर 17 बार पहुंची, चुकी छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन घोटाले को लेकर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी में कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को घोटाले का मास्टरमाइंड माना गया है। 

ईडी ने अब तक आइएएस समीर बिश्नोई, जयप्रकाश मौर्या, रानू साहू, महासमुंद के पूर्व विधायक अग्नि चंद्राकर, उनके दामाद कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, एलके तिवारी, नवनीत तिवारी, लक्ष्मी तिवारी, रजनी तिवारी, बादल मक्कड़, सन्नी लूनिया, अजय नायडू के आवास की जांच की। रायपुर में देवेंद्र नगर में सीए अजय मालू, कोयला कारोबारी सुनील अग्रवाल, शराब कारोबारी प्रिंस भाटिया, खनिज विभाग के डिप्टी डायरेक्टर शिव शंकर नाग से पूछताछ की है।

ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो रायगढ़ कलेक्टर रानू साहू की जांच पूरी हुई है। ईडी ने रायगढ़ और कोरबा के डीएमएफ के दफ्तर को सील कर दिया है। यही नहीं, डीएमएफ की राशि के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। खनिज परिवहन के पास और डीएमएफ से जुड़े दस्तावेज, अधिकारियों के लैपटाप और मोबाइल की जांच की जा रही है।

कोर्ट में पेश दस्तावेज में ईडी ने कहा कि सूर्यकांत ने अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों का एक गठजोड़ तैयार किया और 14 महीने में 500 करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया। ईडी की कार्रवाई से पहले सूर्यकांत फरार हो गया है। कोयला परिवहन घोटाले में ईडी ने आइएएस समीर बिश्नोई को गिरफ्तार करके आठ दिन की रिमांड पर लिया है।

ईडी की मानें तो सूर्यकांत ने अपने साथियों के साथ मिलकर अवैध वसूली का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया था। ट्रांसपोर्टरों को डीओ तभी मिलता था, जब रिश्वत की राशि अधिकारियों के पास पहुंच जाती थी। इस घोटाले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों में डीएमएफ फंड के उपयोग पर रोक लगा दी है।

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