सुकमा/रायपुर, 12 जुलाई।
नक्सलवाद की चपेट में दशकों से घिरे छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में अब बदलाव की बयार बह रही है। शनिवार को सुकमा जिले में 1.18 करोड़ रुपये के इनामी 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। इन्हें मिलाकर बीते 24 घंटों में कुल 45 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था जताई है।
इन नक्सलियों ने सुकमा में जिला प्रशासन, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया। इनमें कई हार्डकोर नक्सली शामिल हैं, जो लंबे समय से संगठन के रणनीतिक अभियानों में सक्रिय रहे थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को ‘आस्था की जीत’ बताते हुए कहा कि – “अब बस्तर में बंदूक की गोली नहीं, विकास की बोली गूंज रही है। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे का प्रतीक है जो सरकार ने ‘नियद नेल्ला नार’ जैसे जनोन्मुखी अभियानों के माध्यम से गांव-गांव में पहुंचाया है।”
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले 15 महीनों में 1521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह राज्य सरकार की ‘नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ की सफलता का प्रमाण है, जिसके तहत आत्मसमर्पण करने वालों को न केवल कानूनी सुरक्षा दी जाती है, बल्कि सामाजिक पुनर्वास और आजीविका के साधन भी मुहैया कराए जाते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सुशासन और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों को दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर अब तेज़ी से नक्सलमुक्ति की ओर बढ़ रहा है, और आने वाले समय में यह क्षेत्र पूरी तरह विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएगा।
