माड़ बचाओ अभियान और ऑपरेशन मानसून से डरे माओवादी, 4 महिला नक्सली भी शामिल
नरायनपुर, अबूझमाड़ क्षेत्र में लगातार चल रहे माड़ बचाओ अभियान और वर्षा ऋतु में चलाए जा रहे ऑपरेशन मानसून का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। नक्सली संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष, खोखली विचारधारा और सुरक्षाबलों के दबाव के चलते माओवादियों ने आत्मसमर्पण की राह अपनानी शुरू कर दी है।
इसी कड़ी में गुरुवार को नारायणपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कुल 8 सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें प्रमुख रूप से डॉक्टर टीम का सदस्य सुखलाल, प्लाटून नंबर 16 का कमांडर एवं हथियार डिपो का देखरेख प्रमुख कमलेश, और चार महिला माओवादी शामिल हैं। सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों पर कुल मिलाकर ₹33 लाख का इनाम घोषित था।
महिला माओवादियों की भूमिका भी रही प्रमुख
आत्मसमर्पण करने वाली चार महिला नक्सली लंबे समय से सक्रिय थीं और कई महिला दस्तों का नेतृत्व कर चुकी थीं। इनका संगठन के भीतर रणनीतिक और नेतृत्व स्तर पर विशेष योगदान रहा है।
भेदभाव और विचारधारा पर उठ रहे सवाल
प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया ने बताया कि —
“नक्सली संगठन अब अपने ही लोगों के साथ भेदभाव कर रहा है, खासकर बाहरी कैडर और स्थानीय सदस्यों के बीच। संगठन की खोखली विचारधारा को समझते हुए कई माओवादी अब आत्ममंथन कर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय ले रहे हैं। हमारा ‘माड़ बचाओ अभियान’ और ऑपरेशन मानसून इसी बदलाव की एक बड़ी वजह है।”
पुनर्वास की मिलेगी पूरी सुविधा
पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।
