राज्यपाल से मिले CM विष्णुदेव साय, तीन नए चेहरे जुड़ेंगे कैबिनेट में – संगठन और RSS की भी मुहर तय
रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा का विषय है – साय सरकार का आगामी मंत्रिमंडल विस्तार। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शनिवार को राज्यपाल से मिले। राजनीतिक हलकों में इसे विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर से मिल रहे संकेत भी यही बताते हैं कि बहुत जल्द कैबिनेट में तीन नए मंत्री शामिल किए जाएंगे।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का फॉर्मूला
बीजेपी संगठन ने साफ कर दिया है कि नए मंत्रियों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन ही सबसे बड़ा आधार होगा।
- एक चेहरा सामान्य वर्ग से,
- दूसरा अनुसूचित जनजाति (ST) से,
- और तीसरा पिछड़ा वर्ग (OBC) से हो सकता है।
इसके साथ ही संभागीय संतुलन साधने की कवायद भी तेज है। सूत्र बताते हैं कि बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग संभाग से एक-एक मंत्री बनाए जाने की संभावना है। पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में मजबूत राजनीतिक संदेश देना बेहद ज़रूरी है।
संगठन और संघ की भूमिका
भाजपा का हर बड़ा फैसला संगठन और संघ की सहमति से होता आया है। इस बार भी मंत्रिमंडल विस्तार में दो नाम संगठन की पसंद से और एक नाम आरएसएस की अनुशंसा से शामिल किया जा सकता है। इससे सरकार और संगठन के बीच तालमेल और मजबूती का संदेश जाएगा।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, संगठन की रणनीति है कि मंत्रिमंडल में युवाओं, महिलाओं और जनजातीय नेताओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि आगामी चुनावों में पार्टी की पकड़ और मजबूत हो।
पुराने मंत्रियों की कुर्सी सुरक्षित
साय सरकार के मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। सूत्र बताते हैं कि किसी भी पुराने मंत्री को हटाने या विभाग बदलने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। यानी विस्तार का असर सिर्फ नए चेहरों तक ही सीमित रहेगा।
संभावित नामों की चर्चा
भाजपा गलियारों में कई नामों की चर्चा जोर पकड़ रही है।
- बिलासपुर संभाग से अमर अग्रवाल और लखनलाल देवांगन जैसे नेताओं का नाम आगे आ रहा है।
- सरगुजा संभाग से एक आदिवासी चेहरे को शामिल करने पर जोर है, जिसमें शकुन्तला पोर्ते और हेमलाल साहू का नाम चर्चाओं में है।
- दुर्ग संभाग से विजय बघेल और प्रेमप्रकाश पांडे के करीबी किसी नेता को मौका मिल सकता है।
हालांकि, पार्टी ने अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।
चुनावी तैयारी का हिस्सा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार महज सत्ता का संतुलन नहीं है, बल्कि आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों से पहले संगठनात्मक तैयारी का हिस्सा है। भाजपा चाहती है कि नए मंत्रियों के जरिए ग्रामीण और शहरी वोट बैंक दोनों में पैठ मजबूत हो।
साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भी सामाजिक समीकरण साधने का यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
राजधानी में हलचल
राजधानी रायपुर में भाजपा दफ्तर से लेकर मंत्री निवासों तक हलचल तेज हो गई है। नेता लगातार दिल्ली और रायपुर के बीच संपर्क बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि सितंबर के पहले सप्ताह में ही मंत्रिमंडल विस्तार की औपचारिक घोषणा हो सकती है।
