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बस्तर दशहरा की परंपरा एवं संस्कृति का संरक्षण हम सबका दायित्व – सांसद महेश कश्यप

जगदलपुर। बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय के प्रेरणा कक्ष में आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से बलराम मांझी को समिति का उपाध्यक्ष चुना गया।

सांसद एवं समिति अध्यक्ष महेश कश्यप ने इस अवसर पर कहा कि “बस्तर दशहरा हमारी प्राचीन परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। यह पर्व सामाजिक एकता और जनसहभागिता का अनुपम प्रतीक है।” उन्होंने बताया कि दशहरा पर्व से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर संरक्षित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही शासन द्वारा दिए गए बजट के अलावा राष्ट्रीय कंपनियों से सहयोग प्राप्त करने की भी पहल की जा रही है।

सांसद कश्यप ने कहा कि इस बार संभाग के सातों जिलों से देवी-देवताओं के आगमन को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की जाएगी।

बैठक के दौरान बस्तर राजपरिवार के महाराज कमलचंद भंजदेव ने मांझी, चालकी और सेवादारों के रिक्त पदों की भर्ती करने तथा देवी-देवताओं के आश्रय स्थलों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी। महापौर संजय पांडेय ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक पहचान है, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। वहीं कलेक्टर हरिस एस ने समिति को वर्ष 2024 और 2025 के दशहरा बजट की विस्तृत जानकारी दी।

नकटी सेमरा में पौधरोपण कार्यक्रम

बैठक उपरांत समिति सदस्यों और मांझी-चालकी ने नकटी सेमरा दशहरा वन में वृक्षारोपण किया। “एक पेड़ देवी-देवताओं के नाम” परंपरा के तहत विभिन्न प्रजातियों जैसे साजा आदन, साल, महुआ, नीम, आम, आंवला, तेंदू, सागौन, कुसुम, बांस और जामुन के पौधे लगाए गए।

ज्ञात हो कि रथ निर्माण के लिए प्रतिवर्ष लगभग 200 पेड़ों की आवश्यकता होती है। उसकी प्रतिपूर्ति स्वरूप यह परंपरा निभाई जाती है।

इस मौके पर सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडेय, नगर निगम सभापति खेम सिंह देवांगन, बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, वनमंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता सहित बड़ी संख्या में मांझी, चालकी, पुजारी, मेम्बर एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।


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