छत्तीसगढ़ से बिहार तक सियासत गरमाई, भाजपा बोली जहां बघेल जाते हैं वहां कांग्रेस हार जाती है
रायपुर/पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है। इसी बीच कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को बिहार चुनाव के लिए सीनियर ऑब्जर्वर यानी वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। यह घोषणा कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने की।
इस नियुक्ति के बाद कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह बिहार में इंडिया गठबंधन के तहत पूरी सक्रियता से मैदान में उतरने जा रही है। हालांकि, जैसे ही भूपेश बघेल का नाम ऑब्जर्वर की सूची में आया, छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भूपेश बघेल की नियुक्ति पर तंज कसते हुए कहा कि जहां-जहां राहुल गांधी और भूपेश बघेल जाते हैं, वहां कांग्रेस का क्या हश्र होता है, यह पूरे देश को मालूम है। वहीं भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की जैसी स्थिति हुई, वैसा ही नतीजा बिहार में भी देखने को मिलेगा। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के भीतर क्षेत्रीय असंतोष और नेतृत्व संकट के कारण पार्टी को बिहार जैसे बड़े राज्य में उम्मीद से ज्यादा चुनौती मिलेगी।
भूपेश बघेल कांग्रेस के भीतर चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। छत्तीसगढ़ में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान किसानों और कर्मचारियों के लिए शुरू की गई योजनाओं जैसे राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना और मुख्यमंत्री सहायता योजनाओं ने उन्हें मजबूत जनाधार दिलाया था। इससे पहले भी वे हिमाचल प्रदेश, झारखंड, असम, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कांग्रेस के चुनावी ऑब्जर्वर रह चुके हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट पर राहुल गांधी की जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी बघेल को ही दी गई थी।
अशोक गहलोत, जिन्हें राजस्थान की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है, संगठन प्रबंधन और उम्मीदवार चयन में दक्ष माने जाते हैं। वहीं अधीर रंजन चौधरी को विपक्षी एकता के सूत्रधार के रूप में देखा जाता है। इन तीनों नेताओं की टीम बिहार चुनाव में कांग्रेस के लिए मैदान स्तर की रणनीति से लेकर प्रचार और उम्मीदवार चयन तक की निगरानी करेगी।
भाजपा के बयानों पर कांग्रेस ने भी करारा जवाब दिया। छत्तीसगढ़ के पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि भूपेश बघेल जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने थे, तब भाजपा 90 सीटों से घटकर 14 पर आ गई थी। वे एक जमीनी नेता हैं और चुनावी समीकरण को बखूबी समझते हैं। गहलोत और अधीर रंजन जैसे अनुभवी नेताओं के साथ बिहार में कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी।
बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने की संभावना है। एनडीए गठबंधन की ओर से भाजपा और जदयू एक साथ मैदान में हैं, जबकि इंडिया गठबंधन में कांग्रेस, राजद और वाम दलों की भूमिका अहम मानी जा रही है। कांग्रेस की कोशिश है कि वह इस बार बिहार में न केवल अपनी सीटें बढ़ाए बल्कि गठबंधन के भीतर रणनीतिक नेतृत्व क्षमता भी दिखाए।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस ने बिहार चुनाव को लेकर अनुभव और भरोसे की तिकड़ी मैदान में उतारी है। भूपेश बघेल की जमीनी रणनीति, अशोक गहलोत का संगठनात्मक अनुभव और अधीर रंजन चौधरी का संसदीय संवाद कौशल तीनों के संयोजन से पार्टी उम्मीद कर रही है कि बिहार में उसकी सियासी जमीन दोबारा मजबूत होगी।
फिलहाल, इस नियुक्ति ने बिहार से लेकर छत्तीसगढ़ तक सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस की यह तिकड़ी बिहार की सियासत में कितना असर दिखा पाती है।
