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44 साल बाद माओवादी नेता ने थामी मुख्यधारा की डोर


माड़ डिवीजन कमेटी ने भी किया समर्थन, कहा— मौजूदा परिस्थितियों में हथियार छोड़ना सही फैसला


दंतेवाड़ा/सुकमा, 7 अक्टूबर।
दक्षिण बस्तर से नक्सल मोर्चे पर बड़ी खबर सामने आई है। माओवादियों की माड़ डिवीजन कमेटी ने भी हथियार डालने का ऐलान किया है। कमेटी की कमांडर रानीता ने पत्र जारी कर सोनू उर्फ भूपति के आत्मसमर्पण के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में हथियार छोड़ना सही कदम है।


इस बीच, दक्षिण बस्तर डीवीसी सदस्य और डीके एसजेडसी सचिव मंदा रूबेन ने भी 44 साल बाद नक्सलवाद का रास्ता छोड़ दिया है। रूबेन ने तेलंगाना के वारंगल में पुलिस आयुक्त के सामने आत्मसमर्पण किया।


67 वर्षीय मंदा रूबेन कभी संगठन के बड़े रणनीतिकारों में गिने जाते थे। वर्ष 1981 से भूमिगत रहकर नक्सली गतिविधियां संचालित कर रहे थे। अब उन्होंने परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने का संकल्प लिया है।


तेलंगाना पुलिस की पुनर्वास नीति का यह बड़ा परिणाम माना जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह आत्मसमर्पण नक्सली संगठन में अंदरूनी मतभेद और थकान की ओर भी संकेत करता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार आत्मसमर्पणों की श्रृंखला से दक्षिण बस्तर और तेलंगाना सीमा क्षेत्र में माओवादियों की पकड़ कमजोर हो रही है और शांति स्थापना की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

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