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कनघुर्रा मुठभेड़ के बाद दबाव बढ़ा — कुख्यात नक्सली विकास ने 11 साथियों संग किया आत्मसमर्पण

राजनांदगांव से सटे महाराष्ट्र के गोंदिया में बड़ा नक्सली सरेंडर

राजनांदगांव।
छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। बोरतलाव के समीप कनघुर्रा के जंगल में हाल ही में हुई पुलिस–नक्सली मुठभेड़ के बाद एमएमसी (मालकानगिरी–महादेवनगर–कांकर्वाड़ा) जोन में सक्रिय दर्रेकसा दलम के एसजेडसी मेंबर आनंद उर्फ विकास नगपुरे ने अंततः हथियार डाल दिए। विकास ने अपने 11 नक्सली साथियों के साथ महाराष्ट्र के गोंदिया में आत्मसमर्पण किया।


सूत्रों के मुताबिक विकास नगपुरे लंबे समय से एमएमसी जोन के मोर्चों का नेतृत्व कर रहा था और कुख्यात नक्सलियों की सूची में शीर्ष पर माना जाता था। उसकी तलाश महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और मध्य प्रदेश की पुलिस लगातार कर रही थी। सुरक्षा बलों की बढ़ती घेराबंदी, हालिया मुठभेड़ में नुकसान और लगातार दबाव के चलते उसने सरेंडर का रास्ता चुना।


आत्मसमर्पण करने वालों में एमएमसी जोन के डीवीसी मेंबर नागसु उर्फ गोलू और रानो उर्फ रम्मो भी शामिल हैं। इस तरह कुल 11 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। बताया जा रहा है कि इनके सरेंडर से जोन की सांगठनिक क्षमता और असर पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।


इनाम की राशि, नक्सली नाम, पद / भूमिका
आनंद उर्फ विकास नगपुरे
एसजेडसी मेंबर
₹25 लाख
नागसु उर्फ गोलू
डीवीसी मेंबर
₹16 लाख
रानो उर्फ रम्मो
डीवीसी मेंबर
₹16 लाख
अन्य 8 नक्सली
कैडर सदस्य
₹6 लाख (प्रत्येक)
सरेंडर के साथ यह भी माना जा रहा है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सख्त अभियान, विशेषकर कनघुर्रा जंगल में हालिया मुठभेड़, ने नक्सलियों के अंदर भय और असुरक्षा की स्थिति को बढ़ाया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत आगे की प्रक्रिया में शामिल करने की तैयारी चल रही है।


अधिकारियों का मानना है कि यह सरेंडर एमएमसी जोन में नक्सली संगठन की संरचना पर करारा प्रहार साबित होगा और सीमा क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों को रोकने में बड़ा मोड़ ला सकता है।

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