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डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड पर लोकसभा में गरजे बृजमोहन अग्रवाल, बैंकिंग सिस्टम में AI-सेफ्टी लागू करने की मांग


नई दिल्ली/रायपुर, 11 दिसंबर।
देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट और फाइनेंशियल फ्रॉड के मामलों पर रायपुर सांसद एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने गुरुवार को लोकसभा में जोरदार आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि यह नया साइबर अपराध अब इतने खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है कि लोग मानसिक दबाव में अपनी पूरी जीवनभर की कमाई मिनटों में खो रहे हैं, और बैंकिंग सिस्टम इसे एक “सामान्य ट्रांजैक्शन” की तरह प्रोसेस कर देता है।


अग्रवाल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की कि AI-आधारित सेफ्टी होल्ड गाइडलाइंस, बैंकिंग फ्रिक्शन सिस्टम और एस्क्रो मैकेनिज्म तुरंत लागू किया जाए, ताकि हाई-रिस्क ट्रांजैक्शन पर स्वतः रोक लग सके और लोगों की बचत सुरक्षित रहे।


“डिजिटल गिरफ्तारी”—ठगों का नया हथकंडा, कई दिन तक पीड़ितों को रखते हैं बंधक जैसी मानसिक स्थिति में


सांसद अग्रवाल ने सदन को बताया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम सामान्य ठगी नहीं बल्कि एक मनोवैज्ञानिक अपराध बन चुका है।
अपराधी वीडियो कॉल पर खुद को CBI या पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को घंटों—कई बार दिनों तक—डिजिटल निगरानी में रखते हैं।
झूठे केस में फँसाने की धमकी देकर वे पीड़ित को इतनी मानसिक यातना देते हैं कि वह अपनी जमा-पूंजी ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर देता है।


अग्रवाल ने एक चौंकाने वाली घटना का जिक्र किया, जिसमें एक महिला ने सितंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच 32 करोड़ रुपये गँवा दिए।
उन्होंने कहा—
“यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, यह मानसिक उत्पीड़न है। पीड़ित आतंकित होकर खाते खाली कर देता है।”
सुप्रीम कोर्ट भी सतर्क—3,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी, वरिष्ठ नागरिक सबसे बड़े शिकार
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही डिजिटल अरेस्ट को एक गंभीर चुनौती बता चुका है।
देश में अब तक ₹3,000 करोड़ से अधिक की राशि ऐसे साइबर ठगों के पास चली गई है, और इसमें सबसे अधिक पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं।


अग्रवाल ने कहा—
“एक बुजुर्ग जब 30–40 साल की कमाई को एक ही दिन में ट्रांसफर कर देता है, और बैंक उसे रोक नहीं पाता—तो यह व्यवस्था की खामी है।”


सिंगापुर मॉडल अपनाने की मांग — मनी लॉक, कूलिंग ऑफ पीरियड जैसे फीचर भारत में भी हों
अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा कि सिंगापुर में मॉनेटरी अथॉरिटी (MAS) और बैंकों ने हाई-रिस्क ट्रांजैक्शन रोकने के लिए मनी लॉक फीचर और कूलिंग ऑफ पीरियड लागू किया है, जिससे जालसाजी रोकने में बड़ी सफलता मिली है।


उन्होंने कहा—
“भारत में भी AI-ड्रिवन बैंकिंग फ्रिक्शन लागू कर जमा-पूंजी की सुरक्षा को ट्रांजैक्शन की स्पीड से ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”


“सेफ्टी होल्ड मैकेनिज्म लागू हो”—अग्रवाल का सीधा अनुरोध
सदन में अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने कहा—
“मैं वित्त मंत्री से आग्रह करता हूँ कि इन गाइडलाइंस को तुरंत लागू किया जाए।
नागरिकों की मेहनत की कमाई एक पल की घबराहट में खत्म न हो—यह सरकार की जिम्मेदारी है।”

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