आरंग।
साल 2026 की शुरुआत छत्तीसगढ़ में बच्चों के अधिकारों, सहभागिता और भविष्य की चिंता को केंद्र में रखते हुए एक प्रेरणादायी पहल के रूप में हुई। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के मार्गदर्शन में शुक्रवार को ग्राम पंचायत लखोली, विकासखंड आरंग में बाल चौपाल का आयोजन किया गया।
इस बाल चौपाल की खास बात यह रही कि आयोजन खुले वातावरण में पेड़ की छांव तले किया गया, जहाँ बच्चों ने बिना किसी औपचारिकता और भय के अपनी बात खुलकर रखी। प्रकृति के सान्निध्य में आयोजित यह चौपाल बच्चों के लिए संवाद, संरक्षण और विश्वास का प्रतीक बनी।

कार्यक्रम में बच्चों को एक सुरक्षित, संवेदनशील और बालमैत्रीपूर्ण मंच मिला, जहाँ उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पारिवारिक व्यवहार, पढ़ाई का दबाव, डिजिटल माध्यमों के प्रभाव, मोबाइल-इंटरनेट के संतुलित उपयोग, करियर और भविष्य से जुड़े सवालों पर खुलकर संवाद किया। बच्चों की सहभागिता बढ़ाने के लिए रचनात्मक और ज्ञानवर्धक गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।
बाल चौपाल में डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों के बीच बैठकर उनसे सीधा संवाद किया और उनके प्रश्नों का सरल व बालअनुकूल भाषा में समाधान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पेड़ की छांव में बच्चों से संवाद करना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह संदेश है कि बच्चों का भविष्य भी प्रकृति की तरह सुरक्षित और मजबूत होना चाहिए।
डॉ. शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों का संरक्षण केवल कागज़ी प्रावधानों से नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और सहभागिता से संभव है। बाल चौपाल जैसे मंच बच्चों को यह भरोसा दिलाते हैं कि उनकी बात सुनी जाती है और समाज उनके भविष्य को लेकर गंभीर है।
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि बच्चे केवल भविष्य के नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान के सजग और अधिकार-संपन्न नागरिक हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की यह पहल बच्चों के उज्ज्वल, सुरक्षित और सशक्त भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में सामने आई है।
