नवरात्रि में अनोखी भक्ति का दृश्य, झूले पर बैठकर और कीलों के बिस्तर पर लेटकर करती हैं माता की पूजा
दुर्ग, नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी भक्ति के कई अद्भुत और अनोखे रूप देखने को मिलते हैं। दुर्ग जिले के कातरो गांव में एक ऐसी ही अनोखी साधना लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन गई है। यहां “कुंवारी माता” के नाम से प्रसिद्ध एक युवती नवरात्रि के नौ दिनों तक कठोर तप और साधना करते हुए देवी की आराधना करती हैं।
कुंवारी माता की भक्ति का सबसे अनोखा पहलू यह है कि वे अपने पेट पर जवारा स्थापित कर अखंड ज्योति जलाती हैं। नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक यह ज्योति लगातार जलती रहती है और माता विशेष व्रत-साधना के साथ देवी दुर्गा की आराधना करती हैं। इस दौरान वे अन्न-जल का त्याग कर तपस्या करती हैं और भक्त बड़ी संख्या में उनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
इतना ही नहीं, कुंवारी माता की साधना में एक और अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। वे कीलों से बने बिस्तर पर लेटकर देवी की उपासना करती हैं। मान्यता है कि यह कठोर तप देवी के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। नवरात्रि के दिनों में यह दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भक्तों का कहना है कि कुंवारी माता कई वर्षों से इसी तरह नवरात्रि में कठिन साधना कर देवी की आराधना करती आ रही हैं। झूले पर बैठकर भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के बीच पूरे नौ दिन तक यह अनुष्ठान चलता है। श्रद्धालु यहां आकर माता से आशीर्वाद लेते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं।
नवरात्रि के समापन पर जवारा विसर्जन के साथ यह विशेष साधना पूर्ण होती है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन आस्था, परंपरा और देवी भक्ति का अनूठा उदाहरण बन चुका है।
