छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इन सभी पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण कार्यक्रम पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित किया गया। इस दौरान सुरक्षा बलों ने माओवादी इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी दर्ज करते हुए 14.06 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। इसमें 2.90 करोड़ रुपये नकद और करीब 11.16 करोड़ रुपये मूल्य का 7.20 किलोग्राम सोना शामिल है।
इसके अलावा माओवादियों के पास से LMG, AK-47, SLR, INSAS समेत कुल 93 घातक हथियार भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के कई वरिष्ठ कैडर शामिल हैं, जिनमें CyPC मंगल कोरसा उर्फ मोटू, CyPC आकाश उर्फ फागु उईका, DVCM शंकर मुचाकी, ACM पाले कुरसम जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन माओवादियों ने संगठन की विचारधारा को निरर्थक बताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 1 जनवरी 2024 से 31 मार्च 2026 तक बीजापुर जिले में कुल 1003 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। इस अवधि में अब तक 19.43 करोड़ रुपये की बरामदगी हो चुकी है, जिसमें 6.63 करोड़ रुपये नकद और 8.20 किलोग्राम सोना शामिल है।
कार्यक्रम में बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी., सीआरपीएफ ऑप्स सेक्टर बीजापुर के डीआईजी बी.एस. नेगी और बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव सहित पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
पुलिस ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को शासन की नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जीते हुए समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
